खबर का असर, दवाई जलाने के मामले में अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक सस्पेंड
इस खबर को वन इंडिया ने सबसे पहले प्रकाशित कर दवाओं को जलाये जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था।
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल परिसर में कूड़े के ढेर में दवाओं को फेंके जाने के बाद आग के हवाले करने के मामले में शासन ने डीएम की रिपोर्ट के बाद प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने मंडलीय अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ ओपी साही को सस्पेंड कर दिया। सोमवार को निलंबन पत्र लखनऊ से अपर निदेशक स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण कार्यालय में आया। अपर निदेशक डॉ आर के शुक्ला ने डॉ ओपी साही को बुलाकर निलंबन पत्र पर हस्ताक्षर कराकर सौंप दिया। इस खबर को वन इंडिया ने सबसे पहले प्रकाशित कर दवाओं को जलाये जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था।

अस्पताल में जली थीं लाखों की दवाइयां
मंडलीय अस्पताल परिसर में मई माह में दवाओं को कूड़े में फेंक कर आग लगायी गयी थी। लाखों की दवाइयां फेंके जाने के मामले में जिलाधिकारी ने सीएमओ व एडीएम की टीम गठित कर जांच करायी। जांच में पाया गया कि कूड़े के ढेर में फेंकी गयी दवाइयां सरकारी अस्पताल की थी जो मरीजों के हित में प्रयोग न किये जाने से एक्सपायरी हो गयी। इसमें ब्लड प्रेशर की दवा एक्सपायर नहीं हुयी थी। इस मामले में मंडलीय अस्पताल के तात्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ ओपी साही को दोषी पाया गया। इस पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने उन्हें निलंबित कर दिया।

स्टिंग आपेरशन में सरकार की व्यवस्था पर उठाया था सवाल
भले ही प्रमुख सचिव ने तात्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ ओपी साही को दवा को जलाये जाने के मामले में सस्पेंड किया हो। पर हाल ही में एक टीवी चैनल ने उनका स्टिंग ऑपरेशन किया था। इसमें वह शासन की व्यवस्थाओं पर उंगली उठाते नजर आये थे। उन्होंने बताया कि बिना कमीशन के सैलरी जारी नहीं होती, सीएमओ की पोस्ट के लिए 55 लाख से 20 लाख रुपये के लिए जिलों की ग्रेडिंग तय होती है। साथ ही अस्प्ताल के डॉक्टर पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने की शिकायत के बाद भी कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया।
भ्रष्टाचार की शिकायत
मंडलीय अस्पताल के तत्कलीन प्रमुख अधीक्षक हाल ही में प्राइवेट एजेंसी से सिक्योरिटी गार्ड रखने, बिना शासनादेश के मरीजों से भर्ती शुल्क के नाम पर 34 रुपये लेने के साथ ही बिना टेंडर के स्टैंड संचालन कराना। अपना सातवां वेतन लगाकर कर्मचारियों को सांतवे वेतन के लिए परेशान किये जाने का भी आरोप लगा। स्थानांतरण किये जाने के बाद भी जमे रहने पर प्रमुख सचिव महेश गुप्ता के निरीक्षण में भी कर्मचारियों ने इनके खिलाफ शिकायत की थी।












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