VIDEO: कहकर लाया कि बिटिया होगी तेरी तरह! लाश को मुहैया तक नहीं हुई एंबुलेंस

पत्नी और बच्चे की मौत से बिखर चुके महेश की सारी उम्मीदें टूट गई थी। कोई उसकी मदद करने को तैयार नहीं था। पत्नी का शव लेकर एंबुलेंस मांग रहे महेश को नसीब हुआ तो स्ट्रेचर...

इलाहाबाद। सपा राज में यूपी तब शर्मसार हुआ था जब एंबुलेंस न मिलने पर शव कंधे पर ले जाने की घटना सामने आई थी। माना ये जा रहा था कि अब सूबे में योगी सरकार है तो वैसी घटनाएं दुबारा देखने को नहीं मिलेंगी! लेकिन अफसोस यूपी फिर से शर्मसार हुई है। अच्छी भली पत्नी को पूरे रास्ते मां बनने की बधाइयां देते रहा पति क्या जानता था कि यूपी की स्वास्थ्य व्यव्स्था ही उसकी खुशियां छीन लेगी।

दरअसल इलाहाबाद मंडल के कौशांबी जिले में पहले तो गर्भवती महिला के इलाज में लापरवाही बरती गई और जब उसकी मौत हो गई तो शव तक भेजने के लिए अस्पताल प्रशासन आगे नहीं आया। मात्र 800 रुपए के लिए एंबुलेंस का इंतजाम नहीं किया गया। पति से पैसे मांगे गए तो वो रोता हुआ अपनी तंगहाली का दर्द बताता रहा। लेकिन एक साथ दो जाने चली जाने के बाद भी किसी का दिल नहीं पसीजा। आखिरकार मजबूर पति को स्ट्रेचर पर पत्नी का शव लादकर ले जाना पड़ा। सूचना पर मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे तो अस्पताल महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में महिला का शव भेजने के लिए एंबुलेंस का प्रबंध किया गया।

क्या है मामला?

क्या है मामला?

कौशांबी के करारी अहमदीपुर गांव के रहने वाले महेश की पत्नी मालती देवी गर्भवती थी। लेबर पेन शुरू होने पर महेश ने उसे नजदीक के सरकारी अस्पताल सराय अकील सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। महेश बताता है कि पूरी रात मालती दर्द से कराहती रही लेकिन डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया। क्योकि सुविधा शुल्क देने वालों को ही सरकारी अस्पताल में सुविधा मुहैया होती है। नतीजतन मालती की हालत बिगड़ गई और रात भर मालती दर्द में चीखती रही। सुबह उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

हाथ-पैर जोड़े तो हुई ये कृपा

हाथ-पैर जोड़े तो हुई ये कृपा

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मालती को जिला अस्पताल ले जाना था। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कागज पर रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लिया। घंटों रोता बिलखता महेश अपनी गरीबी की दुहाई देता रहा। हाथ पैर जोड़ते महेश की घंटों बाद बात सुनी गई तो एक सरकारी एंबुलेंस मिली। मालती को लेकर वो जिला अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों की घोर लापरवाही के चलते मालती को जिला अस्पताल पहुंचने में देर हो गई। इसके बाद रास्ते में ही तड़प-तड़पकर मालती हिम्मत हार गई। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

अमानवीय हो गया महकमा

अमानवीय हो गया महकमा

इसके बाद तो बस कल्पना की जा सकती है कि किस दर्द से महेश बिलख रहा था। पेट में ही बच्चे ने भी दम तोड़ दिया था। पर अब जो होने जा रहा था वो तो इंसानियत को और भी कुचलता हुआ आगे बढ़ रहा था। शव को घर भेजने के लिए महेश ने डॉक्टर से कहा तो शव को घर तक पहुंचाने के लिए पैसे की डिमांड हुई। सरकारी एंबुलेंस देने के लिए आठ सौ रुपए की रिश्वत मांगी गई। रुपए तो महेश के पास थे नहीं। वो फिर गिड़गिड़ाया, रोया-बिलखा और दुहाई देता रहा। लेकिन अमानवीय हो चुके विभाग से उसे मिली तो सिर्फ दुत्कार। पैसों के आगे धरती के भगवान की इंसानियत मर चुकी थी।

स्ट्रेचर पर शव लेकर चल पड़ा

स्ट्रेचर पर शव लेकर चल पड़ा

पत्नी और बच्चे की मौत से बिखर चुके महेश की सारी उम्मीदें टूट गई थी। कोई उसकी मदद करने को तैयार नहीं था। अलबत्ता तमाशबीनों की भीड़ वीडियो बनाने और फोटो खींचने में जुटी रही। महेश ने पत्नी की लाश को स्ट्रेचर को ही खींचना शुरू किया और घर की ओर रोते हुए चल पड़ा। ये नजारा जिसने भी देखा। उसकी रुह से आह निकल पड़ी। जो भी इस घटना से रूबरू हो रहा था, चौक रहा था, अफसोस कर रहा था लेकिन मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था।

मीडिया पहुंची तो मिली मदद

मीडिया पहुंची तो मिली मदद

घटना की सूचना पर मीडियाकर्मी अस्पताल पहुंच गए। कैमरे में ये अमानवीय घटना कैद हुई और अस्पताल प्रशासन से लेकर सरकार पर सवाल उठे तो हड़कंप मचा। आनन-फानन में आधे रास्ते पहुंच चुके महेश को एंबुलेंस मुहैया कराई गई और उसकी पत्नी की लाश को घर तक पहुंचाया गया। मामले में योगी सरकार क्या एक्शन लेती है, ये तो वक्त बताएगा लेकिन भुवनेश्वर कालाहांडी के दाना मांझी की घटना एक बार फिर आंखों के सामने कौंधी है और हजारों सवाल समाज और सरकार से कर रही है।

देखिए VIDEO...

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