हाईकोर्ट ने माना ऐसे तो टीचरों के लिए भी परीक्षा पास करना मुश्किल

बीटीसी 2012 और 2013 के अभ्यर्थियों के क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स की गणना अलग-अलग की जा रही थी। प्रक्रिया के स्थगित होने के पीछे अभ्यर्थियों का सही ढंग से पात्रता हासिल न कर पाना है।

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश में चल रही टीचर भर्ती प्रक्रिया पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। ये भर्ती प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के तौर पर 12,460 पद पर की जा रही थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि चयन प्रक्रिया में क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स के निर्धारण की प्रक्रिया उलझी हुई है। अभ्यर्थी के अंकों को जोड़ने का एक समान मानक हो। जिससे न सिर्फ पारदर्शिता की शर्त पूरी होगी बल्कि चयन प्रक्रिया में उत्पन्न हुई समस्या दूर होगी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया की अंकों के जोड़ का नया मानक तैयार होने तक कोई चयन न किया जाए। इस बावत सचिव, बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश सरकार को नए सिरे से चयन किए जाने का आदेश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने माना ऐसे तो टीचरों के लिए भी परीक्षा पास करना मुश्किल

क्या है समस्या?

यूपी में चल रही 12,460 सहायक टीचर्स की भर्ती प्रक्रिया के स्थगित होने के पीछे अभ्यर्थियों का सही ढंग से पात्रता हासिल न कर पाना है। दरअसल चयन प्रक्रिया में बीटीसी 2012 और 2013 के अभ्यर्थियों के क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स की गणना अलग-अलग की जा रही थी। यानी की एक ही कोर्स किए जाने के बावजूद उन्हें क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स का एक समान लाभ नहीं मिल रहा था और ये सब विभाग की भर्ती प्रक्रिया में लागू नई गाइडलाइन के चक्कर में हो रहा था। इसी बावत 2012 बैच के कैंडीडेट ज्ञानचन्द्र और अन्य ने याचिका दाखिल की थी।

हाईकोर्ट ने माना ऐसे तो टीचरों के लिए भी परीक्षा पास करना मुश्किल

क्या है गाइडलाइन?

इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका पर न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने सुनवाई की तो गाइडलाइन का जिक्र किया गया। दरअसल 20 दिसंबर 2016 को 12,460 पदों पर सहायक शिक्षक की भर्ती के ल‍िए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने गाइडलाइन जारी की। जिसमें 2012 में प्रथम श्रेणी (60 प्रतिशत) वालों को 12 अंक। द्वितीय श्रेणी (48 से 59 प्रतिशत) को 6 अंक। तृतीय श्रेणी (47 से 33 प्रतिशत) वालों को 3 अंक का क्वालिटी प्वाइंट देने का प्रावधान तय हुआ। लेक‍िन 2013 का बैच जब आया तो नियम बदल गया। दरअसल 2013 में प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी की बजाए ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया गया। जिसके चलते ग्रेड 'ए' (80 प्रतिशत), ग्रेड 'बी' (79 से 65 प्रतिशत), ग्रेड 'सी' 65 से 50 प्रतिशत का नियम बना। वहीं समस्या तब उत्पन्न हुई जब इन्हें क्वालिटी प्वाइंट देना हुआ। क्योंकि ग्रेड 'बी' के लोगों को 12 प्वाइंट दे दिए गए। इससे 2012 बैच के अभ्यर्थियों को सीधे-सीधे झटका लग रहा था।

नए मानक के बाद भर्ती?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद तत्कालिक रूप से भर्ती प्रक्रिया स्थगित हो गई है। न्यायालय ने विभाग की मौजूदा चयन प्रक्रिया को सही नहीं माना और इस पद्धति को गलत करार देते हुए चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी। अब विभाग अपनी गाइडलाइन में संशोधन कर नई मूल्यांकन प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगा। जिसके बाद ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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