UP में निकाय चुनाव को लेकर संशय बरकरार, 27 दिसंबर को आएगा हाईकोर्ट का फैसला

कोर्ट ने चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने पर रोक शनिवार तक के लिए बढ़ा दी थी। खंडपीठ ने मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर आदेश पारित किया था। शनिवार को मामले पर सुनवाई हुई। अब 27 दिसंबर को फैसला आने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट

High Court's decision will come on December 27: उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में हो रही सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुईं थीं। शनिवार को अवकाश के बावजूद मामले पर कोर्ट में सुनवाई हुई। शीतकालीन अवकाश शुरू होने के बावजूद शनिवार को शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनाव के मुद्दे पर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने का फैसला किया है। शनिवार को बहस के बाद मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया। अगली सुनवाई 27 दिसंबर को होगी।

21 दिसंबर को भी हुई थी सुनवाई

कोर्ट ने चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने पर रोक शनिवार तक के लिए बढ़ा दी थी। न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर आदेश पारित किया था। आदेश में, पीठ ने कहा कि उसने 21 दिसंबर को याचिकाकर्ताओं के वकील एलपी मिश्रा की दलीलें सुनी थीं, लेकिन अदालत में काम की भीड़ के कारण वह गुरुवार या शुक्रवार को मामले की सुनवाई नहीं कर सकी।

ओबीसी आरक्षण को लेकर दायर हैं याचिकाएं

पीठ ने कहा कि जनहित याचिकाओं का विषय 17 नगर निगमों और लगभग 761 अन्य स्थानीय निकायों के चुनावों से संबंधित है जिन्हें नगर पंचायत और नगर पालिका परिषद के रूप में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कोर्ट ने कहा कि इन स्थानीय निकायों का मौजूदा कार्यकाल जनवरी में खत्म हो रहा है।

शीतकालीन अवकाश के बाद भी हो रही सुनवाई

पीठ ने कहा, "लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय निकायों का गठन किया जाता है। चुनाव की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करने की आवश्यकता है और इसे अनिश्चितता में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।" इन परिस्थितियों में, पीठ ने सुनवाई करने का फैसला किया। हाईकोर्ट में शीतकालीन अवकाश शुरू होने के बावजूद शनिवार को मामले पर सुनवाई की।

दोनों पक्षों के वकीलों ने दी अपनी दलीलें

पीठ ने आदेश पारित किया क्योंकि दोनों पक्षों के वकीलों ने सहमति व्यक्त की कि मामले को जल्द से जल्द सुना और तय किया जाना चाहिए। इसे देखते हुए पीठ ने मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश से आवश्यक अनुमति लेकर मामले को शनिवार को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। गौरतलब हो कि पीठ ने इस आरोप पर चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी थी कि राज्य सरकार चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुझाए गए ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले का पालन नहीं कर रही है।

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