Hathras News: UP में सत्संग में यह पहला हादसा नहीं, 2016 में वाराणसी में हुई थी 25 लोगों की मौत
Hathras News: उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद में सत्संग के दौरान हुए हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की मरने की खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में यह पहला मामला नहीं है जब सत्संग में भगदड़ के चलते लोगों की मौत हुई है।
इसके पहले भी उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ठीक इसी तरह का हादसा हुआ था। उस हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी। वाराणसी में भी सत्संग खत्म होने के बाद लोग वापस लौट रहे थे। इसी दौरान पुल टूटने की अफवाह पहले और भगदड़ मच गई।

दरअसल, साल 2016 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के डोमरी रामनगर इलाके में जय गुरुदेव का एक सत्संग रखा गया था। उसे सत्संग में शामिल होने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। सत्संग समाप्त होने के बाद वहां से लोग शोभा यात्रा निकाल रहे थे।
यह शोभायात्रा वाराणसी और चंदौली को जोड़ने के लिए गंगा नदी पर बनाए गए राजघाट पुल पर पहुंची थी। दोपहर के समय शोभायात्रा राजघाट पुल से गुजर रही थी इसी दौरान किसी महिला ने पुल टूटने को लेकर शोर मचा दिया।
महिला द्वारा शोर मचाए जाने के बाद भीड़ में शामिल लोग इधर-उधर भागने लगे। क्योंकि गंगा नदी पर बने पुल के दो ही तरफ से लोग भाग सकते थे ऐसे में अधिकतर लोगों को भगाने का मौका नहीं मिल पाया था।
उसे हादसे में भीड़ से कुचल कर 25 महिलाओं और पुरुषों की मौत हो गई थी। हादसे की जानकारी मिलने के बाद डीजीपी के साथ ही प्रमुख सचिव गृह और एडीजी लाइन ऑर्डर भी तत्काल वाराणसी पहुंच गए थे।
वाराणसी पहुंचने के बाद अधिकारियों द्वारा समीक्षा बैठक की गई थी और इस हादसे की कसूरवार मनाते हुए एसपी ट्रैफिक कमल किशोर और एसपी सिटी सुधाकर यादव तथा सीओ कोतवाली राहुल मिश्रा और थानाध्यक्ष रामनगर अनिल कुमार सिंह और थानाध्यक्ष मुगलसराय विनोद यादव को निलंबित कर दिया गया था।
इस हादसे के बाद लोकल इंटेलिजेंस सहित आने एजेंसियों पर भी सवाल उठे थे। मामले के बाद कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। बताया जा रहा है कि सत्संग की उस घटना को यदि गंभीरता से लिया गया होता तो मंगलवार को हाथरस की घटना नहीं हुई होती।












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