दुल्हन के घर पहुंचे बाराती डीजे की धुन पर थिरक रहे थे, तभी अचानक चला पता कि दूल्हा गायब हो गया
आजमगढ़। बाराती दुल्हन के यहां डीजे की धुन पर खूब थिरक रहे थे, शादी को लेकर गांव में बहुत चहल-पहल थी। लेकिन तभी वधू पक्ष को सूचना मिली कि दूल्हा गायब हो गया है, फिर क्या था वह हुआ जिसके लिए लोगों ने सोचा न था।

दूल्हा नहीं आया और ससुराल में बाराती नाचते रहे
उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र में चकसेठवल गांव में बिना दूल्हे की बारात लेकर बाराती दुल्हन के दरवाजे पर पहुंच गए। बाराती डीजे की धुन पर नाच-गा रहे थे, तभी घरातियों ने जब दूल्हे के बारे में पूछा तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था। आखिर वे जवाब तो तब दें जब दूल्हा ससुराल पहुंचा हो।

बारातियों को बनाया घरातियों ने बंधक
आखिर, किसी ने वधुपक्ष को बताया कि दूल्हा आया ही नहीं है। जिसके बाद बिना देर किए वधुपक्ष ने बारातियों को बंधक बना लिया। वहीं, शोरगुल का फायदा उठा ज्यादातर बाराती पहले ही फरार हो चुके थे। वहीं, पूरी रात बाराती ससुराल में ही बंधक बने रहे। जिसके बाद सोमवार को घंटों पंचायत चली। पंचायत में तय हुआ कि अब शादी दूल्हे के भांजे से कराई जाए। जिसके बाद शादी हुई और बारातियों को मुक्त किया गया। बरातियों को छोड़े जाने के बाद दुल्हन को विदा दी गई।

आखिर क्यों नहीं आया दूल्हा ब्याहने?
यह शादी चकसेठवल गांव निवासी स्व. अशोक की पुत्री बबिता और अहरौला थाना क्षेत्र के भकुही गांव निवासी रामवृक्ष पुत्र रामफल के बीच तय हुई थी। शादी से पहले ही रामवृक्ष और बबिता कोर्ट मैरिज भी कर चुके थे। रविवार को रामवृक्ष के घर वाले बारात लेकर बबिता के घर पहुंच गए, लेकिन रामवृक्ष नहीं पहुंचा। उसने बताया था कि वह दिल्ली में है। जॉब करते हुए उसने फोन से बबिता को कहा कि वह सीधे शादी में ही पहुंचेगा।

इधर, घर में शादी की धूमधाम तैयारियां के बाद रिश्तेदार और परिजन बारात लेकर ससुराल निकल पड़े। मगर, रास्ते में दूल्हे के अचानक गायब होने से अफरा-तफरी का माहौल हो गया। जिसके बाद बिना दूल्हे की बारात लेकर बाराती दुल्हन के दरवाजे पर पहुंची। घरातियों ने पहले बारातियों का खूब स्वागत किया। मगर, देर रात तक दूल्हा जब नहीं पहुंचा तो घरातियों का सब्र टूट गया। इससे आक्रोशित हो उन्होंने रामवृक्ष और उसके रिश्तेदारों को खोजा। घरातियों के गुस्से को देखते हुए ज्यादातर बाराती पहले ही खिसक लिए। वहीं, गांव में बिना दूल्हे के बारात आने से लोगों में तरह-तरह की चर्चा होने लगी तो गांववाले एकजुट हो लड़की के परिजनों के यहां पहुंचे। फिर बाराती बंधक बना लिए गए। दूसरे दिन पंचायत बैठी। जहां काफी कोशिश के बाद तय हुआ कि दूल्हा तो नहीं आएगा, अब शादी उसके भांजे रविंद से होगी। जिसके बाद शादी हुई।












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