30 साल के कब्जे वाली गोरखपुर सीट पर बीजेपी 15 हजार से पीछे

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    Gorakhpur By Elections: BJP की 30 साल से कब्जे वाली seat पर Yogi Adityanath की हार । वनइंडिया हिंदी

    गोरखपुर। पिछले तीन दशक से गोरखपुर लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है, लेकिन इस बार के उपचुनाव पार्टी के लिए मुश्किल बढ़ाते नजर आ रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के गढ़ में भाजपा उम्मीदवार तकरीबन 15 हजार वोटों से पीछे है। यहां सपा उम्मीदवार लगातार पहले राउंड से बढत बनाए हुए है। सपा की ओर से यहां प्रवीण कुमार निषाद तो भाजपा की ओर से उपेंद्र दत्त शुक्ला मैदान में हैं। नौंवे राउंड की गिनती के बाद भाजपा उम्मीदवार 14648 वोटों से पीछे हैं।

    तकरीबन 15000 वोटों से आगे

    तकरीबन 15000 वोटों से आगे

    डीएम की ओर से जो आधिकारिक जानकारी नौंवे राउंड के बाद जारी की गई है उसके अनुसार सपा उम्मीदवार प्रवीण कुमार निषाद को 135565 वोट, भाजपा उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ला को 120917 वोट मिले हैं। नौंवे राउंड के बाद भाजपा उम्मीदवार 14648 वोटों से पीछे चल रहे हैं। गोरखपुर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले पांच बार से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट खाली हो गई थी।

    शुरू से रहा है मठ का दबदबा

    शुरू से रहा है मठ का दबदबा

    गोरखपुर में शुरू से ही गोरखपीठ का दबदबा रहा है और यहां हमेशा से ही पीठ का मुख्य पुजारी चुनाव जीतता आया है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1998 से भाजपा के सांसद हैं। वह लगातार यहां से पांच बार सांसद रह चुके हैं। योगी आदित्यनाथ से पहले यहां गोरखपीठ के मुख्य पुजारी महंत अवेद्यनाथ यहां के सांसद थे। वह पहली बार 1989 में हिंदू महासभा की ओर से लोकसभा चुनाव जीते थे। अवेद्यनाथ यहां लगातार तीन बार चुनाव जीते और सांसद रहे।

    पिछले तीस साल से भाजपा

    पिछले तीस साल से भाजपा

    गोरखपुर में पहली बार गोरखपीठ मठ का दबदबता 1967 में देखने को मिला जब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर महंत दिग्विजयनाथ ने यहां चुनाव जीता था। उनके बाद यहां से महंत अवेद्यनाथ ने पहली बार 1970 में चुनाव जीता। हालांकि 1977 में यहां भारतीय लोकदल के उम्मीदवार हरिकेश बहादुर चुनाव जीते थे। जिसके बाद 1980 में वह कांग्रेस के टिकट पर दोबारा 1980 में पर चुनाव जीते। इसके बाद यहां मदन पांडे कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे। लेकिन 1989 में यहां पर एक बार फिर से मठ ने वापसी की और महंत अवेद्यनाथ हिंदू महासभा की सीट पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। 1991 में महंत अवेद्यनाथ ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और फिर से जीतकर लोकसभा पहुंचे और इसके बाद से हमेशा यहां भाजपा का कब्जा रहा है।

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