दो पक्षों के विवाद में बेगुनाह बकरा काट रहा है सजा, जेल में बितानी पड़ी रात
बकरे को उन्होंने अपने बच्चे से भी बढ़कर पाला-पोसा है और तो और बकरे की बीमारी ठीक होने के लिए मन्नत तक मान ली थी। महिला अब ये चाहती है कि उनकी अमानत उनको वापस मिले।
वाराणसी। अक्सर पुलिस पूछताछ के नाम पर किसी को भी घंटों थाने पर बैठा लेती है, लेकिन कुछ ऐसे ही पुलिसिया रवैए का खामियाजा कोई इंसान नहीं, बल्कि एक बेजुबान बकरा भुगत रहा है। हैरान कर देने वाली ये घटना वाराणसी के कोतवाली थाने की है। थाने के लॉकअप के दरवाजे से बंधे इस बकरे की आवाज में दर्द है। कभी लॉकअप का सिखचा तो कभी थाने में खड़ा आटो रिक्शा, बकरे के लिए खूंटे का काम कर रहा है।


ये तस्वीर है, वाराणसी के कोतवाली थाने की। दरअसल ये सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि इस बकरे के दो दावेदार हो गए हैं। शहर के भोजूबीर इलाके में रहने वाली प्रमीला का दावा है कि ये वही बकरा है जो 4 महीने पहले उनके घर के आंगन से चोरी हो गया था। बकरे को उन्होंने अपने बच्चे से भी बढ़कर पाला-पोसा है और तो और बकरे की बीमारी ठीक होने के लिए मन्नत तक मान ली थी। महिला अब ये चाहती है कि उनकी अमानत उनको वापस मिले। लेकिन इस विवाद के बीच आखिर इस बेजुबान बकरे को पूरी रात थाने में बितानी ही पड़ी।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल वाराणसी के शिवपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली प्रमिला देवी का दावा है कि ये बकरा उनके घर से चार महीने पहले संदिग्ध परिस्तिथि में गायब हो गया था। जिसके बाद ये लगता था कि उनका सब कुछ चला गया है। कल को अपना इलाज कराने शिवप्रसाद गुप्ता चिकित्सालय में आए हुए थे तभी उनकी नजर बकरे पर पड़ी तो उन्होंने उसे पहचान लिया। वहीं दूसरा पक्ष राजू जिनके पास वर्तमान में बकरा मौजूद था उसका कहना है कि उन्होंने बकरे को बचपन से पाला है। इसी बात को लेकर अस्पताल परिसर में ही विवाद शुरू हो गया। जिसके बाद किसी ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को थाने ले आई। काफी प्रयास हुआ लेकिन दोनों पक्षों में से किसी ने ये प्रमाण पुलिस के पास प्रस्तुत नहीं किया। लिहाजा सजा बेचारा बकरा भुगत रहा है।

क्या कहते हैं एसएचओ?
कोतवाली थाने के इंचार्ज राजेश कुमार सिंह ने OneIndia को बताया कि दो पक्षों में एक बकरे को लेकर विवाद शुरू हुआ और फिर मामला थाने पहुंचा। मुझे इस बात की जानकारी हुई तो मैंने प्रमाण प्रस्तुत करने वाले को बकरा देने को कहा था लेकिन किसी ने प्रमाण नहीं दिया। दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया था लेकिन अब तक कोई नहीं आया है। जब ये पूछा गया कि क्या बकरा थाने पर है तो उन्होंने कहा कि उसे किसी अन्य के पास रखा गया है। विवाद का निस्तारण होने के बाद उसके असली मालिक को बकरा सौंप दिया जाएगा।












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