Sudhakar Singh: कौन हैं सुधाकर सिंह, जिन्होंने घोसी में BJP के दारा सिंह को हराया, कभी दोनों थे जिगरी दोस्त
Ghosi Bypoll Result Sudhakar Singh Win: उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार सुधाकर सिंह जीत गए हैं। सुधाकर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दारा सिंह चौहान (Dara Singh Chauhan) को हरा दिया है। घोसी विधानसभा सीट पर 5 सितंबर को हुए उपचुनाव के लिए वोटिंग 8 सितंबर को हुई है।
सपा के सुधाकर सिंह के समर्थकों की खुशी का ठिकाना नहीं है। वहीं बीजेपी के दारा सिंह के समर्थकों को उम्मीद थी कि इस बार इस सीट से भाजपा जीतकर आएगी। आइए जानें समाजवादी पार्टी के नेता सुधाकर सिंह के बारे में....?

Who is Sudhakar Singh: कौन हैं सुधाकर सिंह
सुधाकर सिंह उत्तर प्रदेश के एक भारतीय राजनीतिज्ञ और उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य हैं। सुधाकर सिंह समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता हैं और दो बार समाजवादी पार्टी से विधायक रहे हैं।
सुधाकर सिंह ने पहली बार 1996 में सपा से मऊ की लखीमपुर विधाससभा से चुनाव जीता था। वहीं दूसरी बार सुधाकर सिंह ने 2012 में सपा पार्टी से विधायक बने थे। हालांकि सुधाकर सिंह को 2002 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वहीं 2007 में हुए चुनाव में सुधाकर सिंह को सपा ने टिकट नहीं दिया था।
2017 के चुनाव में सुधाकर सिंह को सपा ने टिकट दिया था लेकिन वह भाजपा के कद्दावर नेता फागू चौहान से हार गए थे। फागू चौहान फिलहाल बिहार के राज्यपाल हैं।
जुलाई 2019 में फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाया गया था, जिसके बाद से घोसी विधानसभा सीट खाली हो गई थी। जिसके बाद यहां उपचुनाव कराए गए हैं। इस उपचुनाव में सुधाकर सिंह को सपा ने टिकट नहीं दिया था, इसलिए उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था लेकिन भाजपा के विजय राजभर से हार गए थे।
Sudhakar Singh Dara Singh Chauhan: कभी दारा सिंह और सुधाकर सिंह में हुआ करती थी अटूट दोस्ती
आज भले ही घोसी विधानसभा सीट पर भाजपा के दारा सिंह चौहान और सपा के सुधाकर सिंह आमने-सामने थे, लेकिन कभी इन दोनों में अटूट दोस्ती हुआ करती थी। साल 2002 में दारा सिंह चौहान भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए थे। उस वक्त सपा ने सुधाकर सिंह को टिकट ना देकर घोसी विधानसभा से दारा सिंह चौहान को मैदान में उतारा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उस चुनाव में सुधाकर सिंह टिकट कटने से नाराज नहीं हुए थे बल्कि दारा सिंह चौहान को जिताने में उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। इस दौरान दोनों नेताओं की गहरी दोस्ती हो गई थी। हालांकि जब दारा सिंह के विधायक बनने के बाद भी जब सपा सरकार नहीं बना पाई तो दारा सिंह फिर से भाजपा में शामिल हो गए थे।












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