Ghoshi By Election: घोसी उपचुनाव में किसका खेल बिगाड़ेंगी मायावती, रामपुर की तरह पलटेगी बाजी?

यूपी के मऊ जिले की घोषी में हो रहे उपचुनाव में सपा और बसपा की निगाहें दलित मतदातााओं पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि इस सीट पर दलित वोटर गेमचेंजर साबित हो सकता है।

Bahujan Samaj Party Mayawati: उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम और बहुजन समाज पार्टी (BSP Mayawati) की मुखिया मायावती ने घोषी उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। मायावती के इस चुनाव में न उतरने की क्या वजहें हैं। क्या मायावती के मैदान में न आने से बीजेपी को इसका लाभ मिलेगा या सपा इसका फायदा उठा ले जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का हालांकि इन अटकलों को लेकर यही कहना है कि मायावती का यह दांव रामपुर की तरह बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है।

मायावती

दलित वोटरों को साधने में जुट हैं सपा-बीजेपी

घोषी में हो रहे उपचुनाव में बीजेपी और सपा के बीच आमने-सामने की टक्कर हो रही है। इस सीट पर करीब 80 हजार दलित मतदाता हैं जिनपर दोनों पार्टियों की निगाहें टिकी हुई हैं। दोनों दल दलित वोटरों को साधने में जुटी हुई हैं। सपा और बीजेपी दोनों दलों ने पिछड़े और दलित नेताओं को मैदान में उतारकर उनको लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह ने कहा कि दलित मतदाता अभी अपने पत्ते नहीं खोल रहा है। देखना होगा यह वोटर किधर का रुख करते हैं।

रामपुर लोकसभा उपचुनाव में बसपा ने नहीं उतारा उम्मीदवार

यूपी के रामपुर लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव हुआ था। यह चुनाव इसलिए हुआ था क्योंकि आजम को सजा होने के बाद यह सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर बीजेपी और सपा के बीच सीधी टक्कर हुई थी। राजनीतिक विलेषकों की माने तो रामपुर में जिस रणनीति पर बीजेपी ने किया उसी पर वह आगे बढ़ रही है। रामपुर में बसपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा जिसका वजह ये हुआ कि दलित मतदाताओं को रुझान बीजेपी के पक्ष में चला गया जिससे उसकी जीत आसान हो गई थी।

रामपुर सदर सीट पर भी हुआ था उपचुनाव

रामपुर लोकसभा चुनाव के बाद रामपुर सदर सीट पर भी उपचुनाव हुआ था। यह उपचुनाव आजम के बेटे अब्बदुल्ला आजम के अयोग्य करार दिए जाने के बाद हुआ था। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यहां पर भी बसपा ने अपना उम्मीदवार न उतारकर परोक्ष तौर पर बीजेपी की मदद की थी। चुनाव के बाद यह सीट भी बीजेपी ने सपा से छीन ली थी। यहां भी बसपा के न होने की वजह से बीजेपी के पक्ष में राजनीतिक समीकरण बन गया जिसका लाभ भाजपा को मिल गया था।

घोषी उपचुनाव में भी बीजेपी को मिलेगा दलितों का साथ?

इन दोनों चुनावों के बाद अब बीजेपी घोषी उपचुनाव में अपनी नजर गड़ाए हुए है। बीजेपी को उम्मीद है कि घोषी का मतदाता भी पीएम मोदी और सीएम योगी की नीतियों में विश्वास व्यक्त करते हुए बीजेपी को वोट करेगा। वहीं सपा का दावा है कि जिस तरह से दलितों की उपेक्षा की जा रही है उससे वह अब अखिलेश में अपना विश्वास व्यक्त करेगा। राजनीतिक विश्लेषक कुमार पंकज ने कहा कि घोषी में दलित मतदाताओं की भूमिका निर्णायक साबित होगी। इसलिए सभी दलों की निगाहें दलितों पर टिकी हुई हैं।

2022 में सपा ने बीजेपी को हराया

2022 के चुनावों में सपा ने भाजपा को हराया था गौरतलब है कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से दारा सिंह चौहान घोसी सीट से प्रत्याशी थे। उन्होंने भाजपा के विजय कुमार राजभर को 22216 मतों के अंतर से हराया था। दारा सिंह चौहान को कुल 1,08,430 वोट मिले थे। जबकि, बीजेपी के विजय राजभर को 86,214 मत प्राप्त हुए थे। इसके अलावा तीसरे नंबर पर बीएसपी के वसीम इकबाल रहे थे।

ये है घोषी का जातीय समीकरण

अगर घोसी विधासभा सीट पर मतदाताओं की संख्या की बात करें तो यहां 4024763 वोटर्स है। इनमें पुरुष वोटर्स 228859, महिलाएं 194094 है। यहां मतदेय स्थल 455 और मतदान केंद्र 239 हैं। घोसी सीट पर ये हैं जातिगत समीकरण घोसी विधानसभा सीट पर दलित 60,000, चौहान 45,000, मल्लाह 70,000, यादव 40,000, सिया 45,000, सुन्नी 35,000, राजभर 35,000, भूमिहार 35,000, क्षत्रिय 40,000, ब्राह्मण 20,000, बनिया 15,000, मौर्य 15,000, कुर्मी 10,000, लोहार 10,000, कायस्थ 6,000 है।

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