25 साल बाद अमेठी में गांधी परिवार नहीं लड़ रहा चुनाव, इससे पहले कब और क्यों आई थी ऐसी नौबत?
Amethi Lok Sabha Chunav 2024: यूपी की अमेठी लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव के पहले दो दशकों तक सोनिया गांधी के परिवार का कब्जा था। 25 साल पहले 1999 में वो पहली बार यहां से चुनाव जीतीं और 2004 से 2014 के लोकसभा चुनावों तक यहां से उनके बेटे राहुल गांधी जीतते रहे।
अमेठी में इस बार कांग्रेस ने राहुल गांधी की जगह किशोरी लाल शर्मा (K L Sharma) पर भरोसा जताया है। राहुल पड़ोस की रायबरेली सीट पर शिफ्ट हो गए हैं, जहां से 2004 से सोनिया गांधी चुनाव लड़ती आ रही थीं। हालांकि, सोनिया गांधी के परिवार की अबतक की राजनीति का विश्लेष करें तो अभी जिस तरह से उन्होंने अमेठी से मुंह फेड़ा है, वह कई सवाल खड़े करता है।

2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी की स्मृति ईरानी ने अमेठी में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 वोटों के अंतर से हरा दिया था। इससे पहले 2014 में ईरानी राहुल से 1,07,903 मतों से पराजित हुई थीं।
1999 के पहले बीजेपी के कब्जे में थी अमेठी
1999 में जब सोनिया गांधी पहली बार अमेठी से चुनाव जीतीं तो यह सीट बीजेपी के कब्जे में थी। एक साल पहले ही 1998 के चुनाव में यहां से भाजपा के संजय सिंह ने गांधी परिवार के बेहद खास कैप्टन सतीश शर्मा को 23,270 वोटों से हराया था। 2019 से पहले बीजेपी सिर्फ एक ही बार यहां से चुनाव जीती थी।
अमेठी में 1977,1998 और 2019 में हारी कांग्रेस
यूपी में अमेठी लोकसभा क्षेत्र के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार यहां से 1967 में कांग्रेस के विद्याधर बाजपेयी यहां से चुनाव जीते थे। 1971 के चुनाव में भी यह सीट उन्होंने ही कांग्रेस को दिलाई। लेकिन, आपातकाल के बाद हुए 1977 की जनता लहर में यहां से भारतीय लोक दल के रवींद्र प्रताप सिंह को कामयाबी मिली थी।
अमेठी में पहली बार 1980 में चुनाव लड़ा गांधी परिवार
अमेठी में गांधी-नेहरू परिवार से सबसे पहले चुनाव जीतने का श्रेय संजय गांधी को जाता है, जिन्होंने 1980 में यहां पर सफलता हासिल की थी। उनके असामयिक निधन के बाद यह सीट उनके भाई राजीव गांधी के पास चली गई। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने यहां से 1981,1984,1989 और 1991 के चुनावों तक लगातार चार बार जीत दर्ज की।
1991 के आम चुनावों के दौरान ही राजीव की हत्या हो गई। उस चुनाव में उन्हें अमेठी में 53.23% वोट मिले थे और दूसरे नंबर पर रहने वाले बीजेपी के रवींद्र प्रताप को महज 21.35% वोट मिल पाए थे। तीसरे नंबर पर आने वाले जनता दल के मोहम्मद नईम को 15.55% वोट मिले थे।
1991 के उपचुनाव, 1996 और 1998 में गांधी परिवार ने अमेठी सीट से बनाई दूरी
राजीव गांधी के निधन की वजह से 1991 में ही अमेठी में लोकसभा का उपचुनाव करवाया गया। गांधी परिवार के गढ़ बनने के बाद तब ऐसा पहली बार ऐसा हुआ था कि परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को यहां से कांग्रेस ने टिकट दिया।
कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन सतीश शर्मा को उपचुनाव में 1,78,996 वोट आए और भारतीय जनता पार्टी के एमएम सिंह महज 79,687 ही वोट जुटा सके।
सतीश शर्मा ने 1996 के आम चुनावों में भी कांग्रेस की यह सीट बचाकर रखी। लेकिन, 1998 के आम चुनावों में उन्हें बीजेपी के संजय सिंह के हाथों का हार का सामना करना पड़ा।
इस तरह से जबसे 1980 में अमेठी में संजय गांधी ने कदम रखा, पहली बार 1991 के उपचुनाव में यहां से गांधी परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ा। 1996 और 1998 में भी यहां गांधी परिवार से कोई भी सदस्य चुनाव मैदान में नहीं था। हालांकि, तब सोनिया गांधी के परिवार ने निजी वजहों से सक्रिय राजनीति से दूरी बना रखी थी।
लेकिन, 2024 के आम चुनावों में पहली बार ऐसी नौबत आई है कि सोनिया गांधी परिवार के तीन-तीन सदस्यों (सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा) के सक्रिय राजनीति में होने के बावजूद अमेठी में चुनाव लड़ने से हाथ खड़े कर दिए हैं।












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