छात्रसंघ चुनाव में जीत के लिए पैरों में गिरे छात्रनेता, क्या यही हैं आने वाले नेता?

वाराणसी। यूपी के वाराणसी में छात्रसंघ चुनाव का शनिवार को अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां के राममनोहर लोहिया डिग्री कॉलेज में छात्रसंघ का चुना था। इस चुनाव में प्रत्याशियों ने वोट मांगने के लिए जो तरीका अपनाया वो हास्यापद होने के साथ शर्मसार करने वाला भी था। वोट के लिए ये देश के भविष्य कहे जाने वाले छात्र नेता कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के और लड़िकयों के पैरों में लोटते नजर आए। जब नेता जी ने पैर पकड़ना शुरू किया और भला उनके समर्थक कैसे पीछे रहने वाले थे। सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक इस कॉलेज में ऐसे ही नजारे दिखाई देते रहे जो छात्रसंघ चुनाव की गरिमा को तारतार कर रहे थे।

जीत के लालच ने ये सब करवाया

जीत के लालच ने ये सब करवाया

दरसअल शनिवार को बनारस के रोहनियां थाना क्षेत्र के भैरोतालाब राजातालाब के डॉक्टर राममनोहर लोहिया कॉलेज में सुबह 8 बजे से ही चुनाव को लेकर मतदान हो रहे थे। छात्रों का चुनाव था तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था भी चौकस थी। इस चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,महामंत्री सहित तमाम पदों के लिए कुल 13 उम्मीदवार मैदान में उतरे हुए थे। लाजमी था कि जीत कुछ लोगों को ही मिलनी थी इसलिए जीत के लालच में प्रत्याशी, छात्र और छात्राओं के पैरों में गिर वोट की भीख मांगते दिखाई दिए।

सपा विधायक का सर्मथक प्रत्याशी जीता

सपा विधायक का सर्मथक प्रत्याशी जीता

इस कॉलेज में कुछ 2000 लड़के और लड़कियां पढ़ते हैं जिसमें अध्यक्ष पद के लिए 4 प्रत्याशी मैदान में उतरे हुए थे। जीत हुई पूर्व विधायक और सपा शासन में मंत्री रहे सुरेंद्र पटेल के सर्मथक प्रत्याशी शिवजीत वर्मा की जिसे पुलिस ने तो अपनी सरकारी गाड़ी में घर पहुंचा दिया लेकिन उसके समर्थकों ने राजातालाब बाजार में कई घण्टो तक शक्ति प्रदर्शन किया। ऐसे में सवाल ये उठता है कि ये छात्र नेता जो वोट के लिए सुबह मतदाताओं के पैरों पर गिरकर आशीर्वाद के रूप में उनका मत मांग रहे थे वो शाम होते ही शिष्टाचार भूल गए, ये कैसी राजनीति है ?

मानसिक संतुलन खो चुके हैं छात्रनेता

मानसिक संतुलन खो चुके हैं छात्रनेता

इस पूरे मामले पर oneindia ने वाराणसी के हरिश्चंद्र पीजी कालेज के पूर्व छात्र नेता और वर्तमान समाजवादी पार्टी के पार्षद रविकांत विश्वकर्मा ने बात की तो उन्होंने अपने चुनाव के अनुभव हमसे शेयर किए। रविकांत ने कहा सन 1999 में मैं अपने छात्र जीवन काल मे उपाध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी बना और चुनाव जीत भी। उस समय भी ऐसे नजारे होते थे लेकिन उस वक्त ऐसे लोग कम थे। मैं उन्हें देख स्तब्ध हो जाता हूं। कभी कभी उन पर हंसी भी आती है । छात्रों का पैरों पर गिर कर अपने लिए वोट मांगना ये दर्शाता है कि आज के छात्रनेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके है। आज के जो हालात है वो इस बात के लिए शर्मिदा करते है कि कल के देश के लिए जो नेता इन्ही छात्रसंघों से निकल कर जाते है वो आने वाले दिनों में देश की कैसी दशा और दिशा निर्धारित करेंगे।

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