Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

देश के इस शहर में तिवारी से आजाद बने थे चंद्रशेखर, यहीं चला था जीवन का पहला मुकदमा

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की राजधानी काशी ने भी आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई थी। यहीं से चंद्रशेखर आजाद ने गांधी जी के असहयोग आन्दोलन की शुरुआत वाराणसी से की थी। काशी में ही चंद्रशेखर सीताराम तिवारी का नाम चंद्रशेखर आजाद पड़ा था। इतना ही नहीं देश के इतिहास में पहली बार चंद्रशेखर को 15 कोड़े की सजा अंग्रेज मजिस्ट्रेट खरेघाट पारसी ने अहसयोग आंदोलन में शामिल होने पर सुनाई थी।

14 साल की उम्र में चंद्रशेखर ने अग्रेज अधिकारी का फोड़ दिया था सिर

14 साल की उम्र में चंद्रशेखर ने अग्रेज अधिकारी का फोड़ दिया था सिर

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. सतीश राय बताते हैं कि चंद्रशेखर तिवारी द्वारा 30 मई 1920 में काशी में कांग्रेस के अधिवेशन में असहयोग आन्दोलन की रणनीति तय हुई थी। पहले सहयोगी के रूप में चन्द्रशेखर तिवारी हुए। उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ रणवीर संस्कृत विद्यालय के गेट पर लेट गए और कहा कि जिसे भी विद्यालय में जाना है वह उनके ऊपर से होकर जायेगा। ब्रिटिश सैनिकों और अधिकारीयों को ये बात काफी बुरी लगी। वही इस विरोध की कड़ी में असहयोग आंदोलन का विरोध कर रहे छात्रों ने विदेशी कपड़ों की दुकानों में आग लगा दी। जिसके बाद ब्रिटिश सैनिकों ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया। ये सब कुछ 14 साल के चन्द्रशेखर तिवारी देखते रहे और इस लाठीचार्ज से उग्र होकर अंग्रेज पुलिस अधिकारी के सिर पत्थर मार सिर फोड़ दिया।

मजिस्ट्रेट ने नाराज होकर 12 बेंतो से पीटने की सुनाई थी सजा

मजिस्ट्रेट ने नाराज होकर 12 बेंतो से पीटने की सुनाई थी सजा

असहयोग आंदोलन में महज 14 साल की आयु में चंद्रशेखर शामिल हो गए थे। गिरफ्तारी के बाद जब मजिस्ट्रेट ने उनसे उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्रता और मां का नाम भारत माता बताया। जिससे नाराज मजिस्ट्रेट ने 15 कोड़े बेतों से पीटने की सजा सुनाई। सजा का स्थान चूना गया सेंट्रल जेल का मैदान। युवा चंद्रशेखर को ब्रिटिश सैनिक जब जब बेत मारते उनके मुहं से भारत माता की जय का नारा लगाते रहे। वही जब चंद्रशेखर को रिहाई मिली तो उन्हें लेने पूरा काशी सेंट्रल जेल उमड़ पड़ा। और जेल से बाहर निकलते ही उन्हें कंधे पर बैठाकर शिवपुर जेल से ज्ञानवापी ले आया गया, जहां सभा कर उनका नामकरण करते हुए काशीवासियों ने चन्द्रशेखर तिवारी से चन्द्रशेखर आजाद दिया।

सीएम योगी ने किया था भव्य प्रतिमा का अनावरण

सीएम योगी ने किया था भव्य प्रतिमा का अनावरण

सेंट्रल जेल के डिप्टी जेलर बताते हैं कि आज वह जगह जहां पर चंद्रशेखर आजाद को कोड़े मारे गए थे, बंदियों के लिए यादगार और अपराध के रास्ते को छोड़ देश के प्रति जज्बा पैदा करता हैं। बंदी राजेश बताते हैं कि अक्सर मैं स्थली पर आकर सकून पाता हूं जहा चंद्रशेखर जी को कोड़े मारे गए थे और वो हंस रहे थे। बता दे कि यूपी के सीएम का पद संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने भी सेंट्रल जेल का दौरा किया और जिस स्थान पर उन्हें बेत मारी गयी थी वहां चन्द्रशेखर आजाद की याद में भव्य प्रतिमा का अनावरण भी किया गया था।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+