यूपी पुलिस से नाराज होकर इस दस्‍यु सुंदरी ने दी फिर हथियार उठाने की धमकी कहा- बंदूक छोड़ा है, चलाना नहीं भूली

कानपुर। एक जमाने में बीहड़ की खूंखार डकैत और दस्‍यु सुंदरी के नाम से जाने जाने वाली सीमा यादव फिर सुर्खियों में हैं। कारण है उनका एक फेसबुक पोस्‍ट जिसमें उन्‍होंने दोबारा हथियार उठाने की धमकी दी है। सीमा यादव का कहना है कि इस बार उनके निशाने पर होंगे प्रशासनिक अधिकारी। सीमा ने फेसबुक पर लिखा है कि ''सरकार और प्रशासन यह न समझे कि हथियार रखवाने से सीमा हथियार चलाना नहीं भूल गई। मेरी जिंदगी में बदलाव हुआ है, इसका मतलब ये नहीं कि मेरी दहाड़ और शिकार करने का तरीका बदल गया। मैं आज भी शेरनी की तरह दहाड़ सकती हूं।'' विस्‍तार से जानिए आखिर ऐसा क्‍या हुआ जिसके बाद सीमा को इस तरह का फेसबुक पोस्‍ट करना पड़ा।

50 हजार के इनामी मनोज के एनकाउंटर से गुस्‍से में हैं सीमा

50 हजार के इनामी मनोज के एनकाउंटर से गुस्‍से में हैं सीमा

उल्‍लेखनीय है कि बीते 27 जनवरी 2018 को आजमगढ़ पुलिस ने एक एनकाउंटर किया था। इस एनकाउंटर में 50 हजार के इनामी बदमाश मनोज को मार गिराया गया था। सीमा यादव इसी से दुखी हैं। सीमा का मानना है कि मनोज बेकसूर था। सीमा के मुताबिक पुलिस ने मुकेश को उसके घर के बाहर से उठाया और किसी सुनसान जगह ले जाकर उसका फर्जी एनकाउंटर कर दिया। वो इसकी CBI जांच चाहती हैं और उनकी मांग है कि आजमगढ़ के SP को तत्‍काल सस्‍पेंड किया जाए।

प्राशासनिक अधिकारियों ने मिलने से मना किया, इसलिए वो ही बनेंगे निशाना

प्राशासनिक अधिकारियों ने मिलने से मना किया, इसलिए वो ही बनेंगे निशाना

सीमा के मुताबिक वो इस केस को लेकर कानपुर देहात में प्रशासनिक अफसरों से मिलने की कोशि‍श की, लेकिन सभी ने मिलने से मना कर दिया। सरकार ने अगर मेरी मांग नहीं सुनी तो मैं दोबारा से हथि‍यार उठा लूंगी और मेरे निशाने पर होंगे प्रशासनिक अफसर।

12 साल की उम्र में मजबूरन बनीं डकैत

12 साल की उम्र में मजबूरन बनीं डकैत

सीमा यादव जब 12 साल की थीं तभी उन्हें मजबूरन डाकू बनना पड़ा था। कानपुर देहात के सिकंदरा थाना अंतर्गत महरूपुर गांव की रहने वाली पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा यादव ने बताया, "मेरे 12 साल के होते ही पिता जुलुम सिंह ने शादी तय कर दी। उस जमाने में 10 साल की होते ही लड़की के हाथ पीले कर दिए जाते थे। अक्टूबर 1998 में इटावा के भवानीपुर गांव निवासी कल्लू सिंह से मेरी शादी हो गई। वो 25 साल का था और मैं 11 की। दहेज में एक साइकिल, 25 हजार रु. कैश और एक रिस्टवॉच समेत घर के सारे सामान दिए गए थे।"

पति मारता था और उसने 60 हजार में बेच दिया

पति मारता था और उसने 60 हजार में बेच दिया

ससुराल में आए दिन डकैत आते-जाते थे। एक रात दो दर्जन से ज्यादा डकैत आए। मेरे पति ने मुझसे सभी के लिए खाना पकाने को कहा तो मैंने मना कर दिया। इसपर मुझे इतना मारा गया कि मैं बेहोश हो गई। एक दिन मेरे पति ने सारी हदें पार करते हुए मुझे जहर मिली दाल पिलाने की कोशिश की। मेरे शोर मचाने पर पड़ोसी इकट्ठा तो हुए, लेकिन तब तक मैं बेहोश हो चुकी थी। होश आया तो मैं किसी चंदन यादव के घर थी। चंदन उस समय का नामी डकैत था। उसने बताया कि मेरे पति ने मेरा सौदा 60 हजार रुपए में कर दिया है।

 साल 2005 में किया सरेंडर फिर मिला सच्‍चा प्‍यार

साल 2005 में किया सरेंडर फिर मिला सच्‍चा प्‍यार

2005 में चंदन की हत्या के बाद सीमा ने इटावा SSP दलजीत चौधरी के सामने सरेंडर कर दिया। इन्हें 7 साल की जेल हुई। जेल में सीमा की मुलाकात देवेंद्र राणा से हुई। उनकी कहानी सुनने के बाद देवेंद्र को उनसे प्यार हो गया। जेल से बाहर आने पर जब मां-बाप ने साथ छोड़ा तो देवेंद्र ने हाथ थाम लिया। मई 2012 में दोनों ने शादी की। कभी डकैत रहीं सीमा आज एक बच्ची की मां हैं। उन्होंने सोशल वर्क करने की चाह में पॉलिटिक्स की राह पकड़ी है।

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