यूपी: कानपुर में गंगा ने दिखाया रौद्र रुप, स्कूलों में छुटटी, गांवों से शुरू हुआ पलायन
कानपुर। उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के चलते गंगा नदी अब अपने रौद्र रूप में दिखने लगी है। नदी किनारे के शहरों में बाढ़ का पानी लगातार अंदर घुसता जा रहा है। जिससे करीब 200 गांव प्रभावित हो गए है। इसमें कानपुर, कन्नौज, फर्रुखाबाद, बुलंदशहर, उन्नाव और फतेहपुर है। बाढ़ का पानी गांवों में घुसने से लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इन इलाकों के स्कूल भी जल मग्न हो गए है, जिसके चलते स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है।

कानपुर गंगा में पानी खतरे के निशान से 114 मीटर से महज चार सेमी नीचे था। लेकिन बुलंदशहर के नरौरा बैराज से छोड़े गए पानी के कारण बुधवार सुबह पानी और ऊपर हो गया। बाढ़ की जद में कई और गांव आ गए है। गांवों में बाढ़ का पानी बढ़ जाने से पलायन शुरू हो गया है। बिठूर के दर्जन भर गांवों के करीब 12 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित है। वहीं, नत्थापुरवा, लुधवाखेड़ा, चैनपुरवा गांवों के पांच हजार लोग प्रभावित हो रहे है, लेकिन चेतावनी के बाद भी कई अपना घर नहीं छोड़ रहे है।
जिला प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित लोगों को अस्थाई तौर पर बसया है और उनके खाने-पीने के लिए राहत सामग्री भी उपलब्ध करा रहा है। बता दें कि इन गांवों में यातायात के आवागमन भी ठप्प हो गया है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशाशन की तरफ से नावे लगा दी गयी है और खाने पीने की पूरी व्यवस्था की गयी है। गंगा कटरी में बने कई स्कूलों में बाढ़ का पानी घुसने की वजह से बच्चों की छुट्टी कर दी गई है।
12 हजार लोग हुए प्रभावित
कानपुर के ख्योरा कटरी के सात मजरों समेत दीन पुरवा, खपतिया, हिन्दूपुर, प्रतापपुर और हरिगांव की करीब 12 हजार लोग प्रभावित हुए है। घर के घर डूब गए हैं। प्रशासन ने गंगा बैराज मंधना रोड पर बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों के लिए स्थाई तौर पर रहने का इंतजाम किया है। वहीं आज जिलाधिकारी विजय विश्वास पन्त गंगा बैराज में बने बाढ़ राहत शिविरों का कर रहे निरीक्षण गंगा बैराज के बाय बंधे पर जिला प्रशासन ने बनाया ग्रामीणों के लिए टेंट बनाये। जिससे ग्रामीण बरसात होने पर उसके अंदर शरण ले सके।












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