फ्लैश बैक 2021: पूरे साल विवादों से रहा राम मंदिर का नाता, कभी तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भी उठे थे सवाल
लखनऊ, 22 दिसंबर: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक रूप से चर्चा का केंद्र बन गई है। पिछले एक साल में कई ऐसे मौके आए जब अयोध्या में जमीन खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगे। इसी साल जून में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय पर आरोप लगे। उस समय भी विपक्ष ने हंगामा खड़ा किया था। अब एक बार फिर चुनाव से पहले अयोध्या सियासत की केंद्र में हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि अयोध्या पिछले एक साल के दौरान कब कब विवादों से घिरी और उसे लेकर क्या क्या सियासत हुई। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अयोध्या हमेशा से सही पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए हाट टॉपिक रहा है। लेकिन इस बार चुनाव नजदीक होने की वजह से दबाव योगी सरकार पर है इसीलिए गंभीरता दिखाते हुए सीएम योगी ने तुरंत इस मामले की जांच के लिए समिति का गठन कर दिया ताकि विपक्ष इसे मुद्दा न बना सके।

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इससे पहले इसी साल जून में ही विपक्ष ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए जमीन की खरीद में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता का आरोप इसी साल जून में लगाया था उस समय आप सांसद, संजय सिंह और अयोध्या से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया था कि मंदिर परिसर के लिए खरीदी गई जमीन का एक पार्सल 2 करोड़ रुपये के एक पंजीकृत समझौते का हिस्सा था और कुछ ही मिनटों के बाद उसी जमीन को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 18. 5 करोड़ रुपये में बेंच दिया गया था। लगभग एक साथ हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में लखनऊ में दोनों राजनेता संजय सिंह और अयोध्या में तेज नारायण पांडे ने दो भूमि खरीद समझौतों की प्रतियां पेश कीं थीं।
इस मामले को लेकर ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने कहा था कि राम मंदिर के लिए जमीन खरीदने में घोटाले के जो आरोप लगाए गए हैं, वे राजनीति से प्रेरित और गुमराह करने वाले हैं। राय का कहना है कि मंदिर के लिए जो भी जमीन खरीदी गई है, उसकी कीमत खुले बाजार से कम है। ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'धोखाधड़ी के आरोप गुमराह करने वाले और राजनीति से प्रेरित हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने जो भी जमीन खरीदी उसकी कीमत खुले बाजार से काफी कम है।
राय ने कहा था कि,
'श्री राम जन्मभूमि पर नौ नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जमीन खरीदने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में लोग अयोध्या पहुंचने लगे। जिस प्लॉट के बारे में समाचार पत्र में चर्चा की जा रही है, वह रेलवे स्टेशन के समीप है और बहुत महत्व रखता है। जमीन की खरीद-फरोख्त आपसी सहमति एवं बातचीत के आधार पर की जा रही है।'
वहीं इस बार आरोप तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर नहीं बल्कि वहां तैनात अधिकारियों और बीजेपी नेताओं पर लगे हैं। इन आरोपों को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर निर्माण को मंजूरी देने के फैसले के बाद अयोध्या में जमीन के पार्सल खरीदने वाले नौकरशाहों और राजस्व अधिकारियों के विधायकों और रिश्तेदारों की जांच का आदेश दिया है। विशेष सचिव राजस्व राधेश्याम मिश्रा द्वारा मामले की जांच करने की उम्मीद है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अगले 5-7 दिनों में संबंधित दस्तावेजों के साथ सरकार को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 17 एकड़ जमीन खरीदने वाले 15 लोगों ने शुचिता और हितों के टकराव का सवाल उठाया है जिसकी जांच योगी आदित्यनाथ ने करने को कहा है। एमपी अग्रवाल 30 नवंबर, 2019 से अयोध्या के संभागीय आयुक्त हैं। उनके ससुर केशव प्रसाद अग्रवाल ने 10 दिसंबर, 2020 को एमआरवीटी महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट (एमआरवीटी) से 31 रुपये के भुगतान पर बरहटा मांझा में 2,530 वर्ग मीटर खरीदा। लाख। उनके साले आनंद वर्धन ने उसी दिन एमआरवीटी से 15.50 लाख रुपये के भुगतान पर उसी गांव में 1,260 वर्ग मीटर खरीदा।
पुरुषोत्तम दास गुप्ता 20 जुलाई, 2018 से 10 सितंबर, 2021 के बीच अयोध्या के मुख्य राजस्व अधिकारी के रूप में तैनात थे। उनके बहनोई अतुल गुप्ता की पत्नी तृप्ति गुप्ता ने 12 अक्टूबर, 2021 को बरहटा मांझा में 1,130 वर्ग मीटर के भुगतान पर खरीदा था। एमआरवीटी से 21.88 लाख रुपये। इसे अमरजीत यादव नाम के एक शख्स के साथ पार्टनरशिप में खरीदा गया था। अनुज झा, जो अब पंचायती राज के निदेशक हैं, 21 फरवरी, 2019 से 23 अक्टूबर, 2021 तक अयोध्या के डीएम थे।
28 मई, 2020 को उनके पिता बद्री झा ने मुगलपुरा में 23.40 लाख रुपये की 320.631 वर्ग मीटर भूमि खरीदी। राम मंदिर स्थल। आईपीएस दीपक कुमार को 26 जुलाई, 2020 से 30 मार्च, 2021 के बीच डीआईजी के रूप में तैनात किया गया था। 1,020 वर्ग मीटर भूमि उनकी पत्नी की बहन महिमा ठाकुर के नाम पर बरहटा मांझा में 1 सितंबर, 2021 को एमआरवीटी से 19.75 लाख रुपये में खरीदी गई थी। .
रिपोर्ट के अनुसार, इंद्र प्रताप तिवारी (एमएलए गोसाईगंज), वेद प्रकाश गुप्ता (एमएलए अयोध्या), उमाधर द्विवेदी (यूपी कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस), ऋषिकेश उपाध्याय (अयोध्या के मेयर), आयुष चौधरी (पूर्व अनुमंडल दंडाधिकारी, अयोध्या), अरविंद चौरसिया (सर्कल अधिकारी), हर्षवर्धन शाही (राज्य सूचना आयुक्त), बलराम मौर्य, (सदस्य, राज्य ओबीसी आयोग), बद्री उपाध्याय (गांजा गांव के लेखपाल), सुधांशु रंजन, (कानूंगो, गांजा गांव), दिनेश ओझा (पेशकर के) भान सिंह, सहायक अभिलेख अधिकारी एमआरवीटी के खिलाफ मामलों की सुनवाई) ने भी अपने रिश्तेदारों के नाम पर राम मंदिर के आसपास जमीन खरीदी थी।
जमीन खरीदारी में अधिकारियों के नाम आने के बाद समाजवादी पार्टी नेता तथा उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व राज्य मंत्री पवन पाण्डेय ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। पूर्व मंत्री ने कहा कि,
''योगी सरकार में राम के नाम पर अधिकारी और नेता लूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के अधिकारी राम-राम जपते हैंlएमपी अग्रवाल जो पहले डीएम थे और अब कमिश्नर बन कर लूट कर रहे हैं। पहले वाले डीएम अनुज कुमार झा ने अभी अपने अधिकारियों के नाम जमीनें खरीदी। गरीबों को धमका कर उन्हें डरवाकर उनकी जमीनें अधिकारियों ने ली है और उसके नाम पर दलाली भाजपा नेताओं ने की है।''
नगर आयुक्त विशाल सिंह का बगैर नाम लिए तंज कसते हुए पवन पाण्डेय ने कहा हरिश्चंद्र का चोला पहने पहले भोलेनाथ की नगरी काशी को लूटा और अब राम की नगरी में लूट मचाने आए हैं।टैक्स के नाम पर साफ -सफाई के नाम पर न जाने कितने टैक्सों के नामों पर पर पिछले 2 वर्षों से अयोध्या में लूट की जा रही है। पूर्व राज्यमंत्री ने कहा दर्जनों बार अयोध्या मुख्यमंत्री आए हैंl और उनके अधिकारी लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं तो नैतिकता के आधार पर बाबा को इस्तीफा दे देना चाहिए।












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