कानपुर: 5 गुरुओं ने मिलकर सरकारी स्कूल का कर दिया कायापलट

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में शिक्षा जगत से रिटायर्ड पांच टीचरों ने ऐसा कर दिखाया है जिसको देखने के बाद जितनी भी प्रशंसा की जाए, वो कम है। रामकृष्ण नगर स्थित सरकारी परिषदीय प्राथमिक विद्यालय की लचर और कमजोर हो चुकी पढ़ाई व्यवस्था को सुधारने वाले पांच शिक्षकों ने विद्यालय को गोद लेकर स्कूल की दिवार पर लिख दिया- ना उम्र की सीमा है ना फीस का बंधन, पढ़ना ही मकसद है, सुखमय सुन्दर जीवन।

रिटायर्ड शिक्षकों ने किया बड़ा काम

रिटायर्ड शिक्षकों ने किया बड़ा काम

वर्ष 2000 में जब विद्यालय के पड़ोस में रहने वाली टीचर विजय लक्ष्मी अपने कार्यकाल से रिटायर्ड हो गयीं। एक दिन उन्होंने विद्यालय की तरफ रुख किया तो वहां के हालातों को देख आश्चर्यचकित हो गयीं, क्योंकि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के पास न तो सही ड्रेस थी और न ही पढ़ने के लिए कॉपी किताबें, जिसको देख उनसे रहा नहीं गया।

बच्चों के लिए ड्रेस और किताबें

बच्चों के लिए ड्रेस और किताबें

एक दिन उन्होंने अपने साथ के अन्य रिटायर्ड टीचरों को घर बुलाकर एक अनोखा फैसला लिया जिसमे उन्होंने बच्चों को मुफ्त में शिक्षा, ड्रेस और उनकी कॉपी-किताबों का खर्चा स्वयं उठाने की ठान ली। आज का दिन ऐसा है कि स्कूल के अंदर जाते ही ऐसा लगता है कि मानो किसी बोर्डिंग स्कुल में पहुँच गए हों।

गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे शिक्षक

गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे शिक्षक

अपने इस मुकाम को सफल देखने के बाद न केवल टीम की सदस्य खुश हैं बल्कि अन्य टीचर सहित यहाँ पढ़ने वाले बच्चे भी खुश हैं। उनका कहना है कि ऐसी मुहिम से देश के हर बच्चे का भविष्य बनाया जा सकता है। सहयोगी टीचर सांता मुखर्जी का कहना है कि हम लोगों ने दो स्कूलों को गोद लिया है। इन पांच गुरुओं ने एक सरकारी स्कूल की सूरत बदल कर रख दी और वे यहाँ पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों का भविष्य बनाने का काम कर रहें है।

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