अखिलेश ने दिखाया बड़ा दिल तो रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली, चाचा-भतीजे के साथ आने से बढ़ी BJP की टेंशन
लखनऊ, 16 दिसंबर: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को लंबे समय के बाद एक बड़ा उलटफेर हुआ लंबे समय के बाद एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। सारी अटकलों पर विराम लगाते हुए समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव खुद अपने कार्यालय से निकलकर अपने चाचा शिवपाल यादव से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे। उनके साथ एक घंटे तक विधानसभा चुनाव को लेकर मंथन हुआ। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि शिवपाल यादव का साथ मिलने के बाद अब अखिलेश पूरे तेवर के साथ बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। हालांकि बीजेपी का दावा है कि पहले भी सपा-बसपा के गठबंधन का हश्र यूपी में जनता देख चुकी है। इसलिए चाचा-भतीजे के इस गठबंधन का बीजेपी पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है।

मिशन 2022 के लिए एक साथ जुटेंगे अखिलेश-शिवपाल
हालांकि बीजेपी के सूत्रों की माने तो अंदरखाने बीजेपी अब इस बात पर मंथन करेगी कि वह कौन सी सीटें हैं जहां शिवपाल और अखिलेश के एक साथ आने से फर्क पड़ेगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव गुरुवार को अपने चाचा शिवपाल को मनाने पहुंचे और करीब एक घंटे तक चाचा और भतीजे के बीच मिशन 2022 में होने वाले चुनाव में गठबंधन को लेकर चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि मुलाकात में ये तय हुआ हैबकी समाजवादी पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी गठबन्धन के साथ चुनाव लडे़गी।

प्रसपा और सपा के गठबंधन से बीजेपी की बढ़ेंगी मुश्किलें
अखिलेश यादव और शिवपाल यादव से मुलाकात की जानकारी सियासी गलियारे में निहितार्थ निकाले जा रहे है। पिछले कई माह से चाचा शिवपाल और उनके भतीजे अखिलेश यादव एक दूसरे के प्रति नरमी दिखा ऐसे में लंबे समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ही चाचा और भतीजे के साथ मिलकर चुनावी मैदन में उतरेंगे। इससे पहले ही शिवपाल सिंह यादव ने गुरुवार को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नगर व जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई थी।

अखिलेश ने खुद ट्वीट कर दी गठबंधन की जानकारी
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गुरुवार ट्वीट के माध्यम से लिखा कि प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मुलाक़ात हुई और गठबंधन की बात तय हुई। क्षेत्रीय दलों को साथ लेने की नीति सपा को निरंतर मजबूत कर रही है और सपा और अन्य सहयोगियों को ऐतिहासिक जीत की ओर ले जा रही है। बाइस में बाइसिकल। इस दौरान शिवपाल यादव के घर के बाहर दोनों नेताओं के समर्थकों की भीड़ भी जमा हो गई और दोनों की एकता के नारे लगाने लगे। शिवपाल यादव इससे पहले मीडिया में कई बार यह बयान देते रहे हैं कि अखिलेश को जो फैसला करना है वह जल्दी करें। वहीं, दूसरी तरफ अखिलेश यादव यह कहते रहे थे कि समय आने पर मुलाकात और बातचीत हो जाएगी। आखिरकार वह गुरुवार को अपने चाचा शिवपाल के पास पहुंच गए।

बीजेपी ने कहा- शिवपाल-अखिलेश के गठबंधन से कोई फर्क नहीं
उधर, सपा मुखिया अखिलेश और शिवपाल के मुलाकात को लेकर भाजपा के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने निशाना साधा और कहा कि सपा-बसपा मिलकर भाजपा को नहीं हरा पाईं।अब चाचा-भतीजा मिलकर क्या कर लेंगे। दोनों की मुलाकात से भाजपा को फर्क नहीं पड़ता-दिनेश शर्मा। शिवपाल यादव कभी भाजपा की बी टीम नहीं थे। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री थे उसी दौरान ही चाचा और भतीजे की राह अलग हो गई थी। इसके बाद शिवपाल यादव ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी। अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की पार्टी अभी तक अकेले चुनाव लड़ रही थी। इस बार दोनों ने फिर से एक होने के संकेत दिए हैं।

एक घंटे तक अखिलेश-शिवपाल के बीच हुई चर्चा
इस बैठक के बाद ही अखिलेश यादव शिवपाल के आवास पहुंचे। काफी दिनों से दोनों दलों के एक होने की चर्चा चल रहीं थीं। ऐसे में अखिलेश का शिवपाल के आवास जाना, दोनों के एक होने के संकेत दे रहा है। शिवपाल और अखिलेश की मुलाकात करीब एक घंटे तक चली और उसके बाद अखिलेश निकल गए। उन्होंने इस दौरान मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। यह भी बताया जा रहा है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव पहले से ही शिवपाल के आवास पर मौजूद थे।












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