बिहार: मुआवजा ना मिलने से नाराज किसानों ने हाइवे पर ही शुरू कर दी केले की खेती
पटना। बिहार में सड़क निर्माण के लिए किसानों से ली गई जमीन का अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजा ना मिलने के कारण गुस्साए किसानों ने चलती हाइवे पर ही केले की खेती शुरू कर दी है। बिहार शरीफ से गया फोर लेन नेशनल हाइवे के निर्माण के लिए किसानों से उनकी जमीन ली गई थी। जमीन लिए वक्त बीत गया सड़क भी बनकर तैयार हो गई लेकिन किसानों को उनका मुआवजा नहीं मिला। इससे नाराज किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल अनोखे और नायाब तरीके से विरोध करना शुरू कर दिया है। किसानों का विरोध अनोखा होने के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।

मुआवजे का नहीं है कोई अता-पता
गौरतलब है कि पावापुरी, राजगीर और नालंदा को गया से जोड़ने के लिए पर्यटन कॉरिडोर के लिए सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमे सिलाव थाना स्थित गांव के किसानों की हजारों एकड़ जमीन सड़क निर्माण में चली गई। सरकार ने मुआवजे का भी प्रावधान रखा था, लेकिन मुआवजा कब दिया जाएगा इसका निश्चय नहीं हो पाया। जिसकी वजह से जिन किसानों की जमीन सड़क निर्माण में गई उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। अब किसान उस जमीन को ना तो खेती के काम ला सकते थे और ना ही किसी अन्य निर्माण में, इसलिए यहां के किसानों ने केले की खेती का नायाब तरीका निकाला और सड़क पर ही केले के पेड़ लगा दिए। अब सैकड़ों केले के पेड़ सड़क किनारे लगे पड़े हैं।

सड़क वाली खेत पर दोबारा कब्जा शुरू
किसानों का आक्रोश इससे और बढ़ गया कि उन्होंने अपने मुआवजे के लिए जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं से इन्हें न्याय की दिलाशा तक नहीं मिली। जिसके बाद किसानों की मीटिंग बुलाकर निर्माणाधीन रोड पर ही खेती करने का निर्णय पंचायत में लिया गया और सभी ने रोड पर जहां जिनकी जमीन थी उस जमीन पर केले के पेड़ लगाने शुरू कर दिए और अब सैकड़ों पेड़ फोरलेन पर लगा दिए गए हैं। किसानों का कहना है कि हम न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक गए हैं। अब कोई नहीं सुनता इसलिए हमने अपने खेत अपने कब्जे में करना शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री के गृह जिला की घटना करती है आश्चर्यचकित
किसानों ने कहा हमे न्याय चाहिए और नियमानुसार मुआवजा, नहीं तो विरोध जारी रहेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला के किसानों के जमीन अधिग्रहण के बाद उन्हें नियमानुसार मुआवजा नही मिलना आश्चर्यचकित करने वाला है और किसानों का यह विरोध भी जायज है। किसानों के द्वारा फोरलेन पर केले के पेड़ रोपे जाने व विरोध करने की जानकारी जब जिलाधिकारी को हुई तो उन्होंने राजगीर एसडीओ को किसानों से बात करने को भेजा। किसानों की समस्या के लिए किसानों के साथ बैठक कर उनके समस्या और जमीन अधिग्रहण के मुआवजे की बात अब फिर से शुरू हो चुकी है।












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