"ऐसा प्रधानमंत्री जो सौभाग्य से अर्थशास्त्री था...", डीडीयू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने बताई ये खास बातें

Manmohan Singh Latest News In Hindi DDU University Gorakhpur: देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का गुरुवार को दिल्ली एम्स में निधन हो गया। इनकी मौत की सूचना मिलते ही पूरे देश से लोगों ने शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया जिसका क्रम शुक्रवार को भी जारी है। इसी क्रम में वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के अर्थशास्त्र विभाग के हेड प्रोफेसर संदीप कुमार से खास बातचीत की। इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था को किस तरह डॉक्टर मनमोहन सिंह ने एक नई दिशा और गति प्रदान की इस पर विस्तार से चर्चा हुई।

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    अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संदीप कुमार ने कहा कि मनमोहन सिंह जी मूलरूप से एक अच्छे विद्यार्थी थे। देश विदेश में उन्होंने अर्थशास्त्र का अच्छा अध्ययन किया था। इसलिए किसी भी देश के अर्थव्यवस्था के जितने भी महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं चाहे वह बैंकिंग हो या अंतरराष्ट्रीय पहलू, इन सब की अच्छी समझ थी उनको।

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    उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक को भी संभालने का कार्य किया था। 80 के दशक में जब आर्थिक संकट की समस्या आ रही थी उसके बाद एक ऐसे प्रधानमंत्री को देखने का मौका मिला जो सौभाग्य से अर्थशास्त्री थे। विषम स्थितियों के लिए वह सर्वोत्तम व्यक्ति थे।
    सभी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की समझ रखने वाले मनमोहन सिंह ने देश विदेश में देखा था कि जो वैश्वीक दौर है उनमें अर्थव्यवस्थाएं कट कर नहीं रह सकती । अपनी अर्थव्यवस्था को अगर हम वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ते हैं तो जो संकट की स्थितियां है उनसे निकलकर कई अवसर मिल सकते हैं। जिससे तात्कालिक समस्या से राहत मिलेगी और दीर्घकालिक समय का एक रोड मैप तैयार होगा।

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    इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर उन्होंने नई आर्थिक नीति की शुरुआत की। निःसंदेह अगर कोई प्रधानमंत्री है और वह अर्थशास्त्री है तो उससे अच्छा नीति कोई और नहीं बना सकता। नई आर्थिक नीति के साथ ही उन्होंने नई औद्योगिक नीति की भी शुरुआत की।

    उन्होंने विदेशी विनियमन की समस्या को खत्म किया। धीरे धीरे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का काम किया। उन्होंने जो उदारवादी नीति बनाई थी उनमें से बहुत सारी नीतियों का पालन आज की सरकार भी कर रही है। इन नीतियों से देश में रोजगार के अवसर बढ़े। क्योंकि काम काज बढ़ा, लोगों की आय बढ़ी। साथ साथ निर्यात और आयात का क्षेत्र भी बढ़ा।

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