एक सप्ताह में होगा 17 जातियों को OBC से बाहर निकालने वाला ड्राफ्ट तैयार, जानिए संजय निषाद के क्या हैं दावे
लखनऊ, 07 सितंबर: इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत 17 जातियों को अधिसूचित करने वाले तीन सरकारी आदेशों को रद्द करने के लगभग एक सप्ताह बाद योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद और राकेश सचान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और मझवार (मछुआरे) समुदाय को आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की। संजय निषाद निषाद पार्टी के अध्यक्ष भी हैं जो राज्य में भाजपा की सहयोगी है। निषाद ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

संजय निषाद ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताई पूरी बात
कैबिनेट मंत्री (मत्स्य विभाग) डॉ संजय कुमार निषाद ने बुधवार को अपने सरकारी आवास 01 विक्रमादित्य मार्ग पर प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि बीते कई दिनों से 17 जातियों के आरक्षण के मुद्दे पर कई प्रकार की भ्रंतिया सोशल मीडिया और विपक्षियों द्वारा फैलाई जा रही थी। पहले तो मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि निषाद, केवट, मल्लाह, बिंद, कहार, कश्यप, धीमर, रैकवार, तुरैहा, बाथम, भर, राजभर, धीवर, प्रजापति, कुम्हार, मांझी, मछुआ 17 जातियों का है, क्योंकि कई दिनों से 18 जातियों की भ्रांतियां फैलाई जा रही है।

सीएम ने दिया है सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन
संजय कुमार निषाद और राकेश सचान ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और मझवार समुदाय को आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की। संजय कुमार निषाद ने अनुसूचित जाति सूची में 18 ओबीसी सहित अधिसूचना को रद्द करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की। संजय निषाद के अनुसार, सीएम ने उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को निषादों से मिलने और मामले को जल्द से जल्द हल करने का निर्देश दिया है।

उपजातियों को परिभाषित करने की जरुरत
निषाद ने कहा कि उनके समुदाय के लिए मुद्दा स्पष्टीकरण के बारे में था। उन्होंने कहा कि मछुआ (मछुआरे) समुदाय की सभी उपजातियां अनुसूचित जाति की सूची में क्रमांक 53 पर मझवार और क्रमांक 66 पर तुराहा के रूप में थीं। उन्होंने कहा कि मछुआ समुदाय की उप जातियों के पर्यायवाची शब्द कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, रायकवार, धीवर, बॉथम, तुरहा, गोदिया, मांझी और मछुआ को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है। निषाद ने कहा कि उनके कैबिनेट सहयोगी राकेश सचान ने भी इसमें पूरा सहयोग किया है।

एक सप्ताह के अंदर तैयार होगा ड्राफ्ट
निषाद ने बताया कि की मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण से 17 जातियों को पिछड़ी से निकालकर अनुसूचित में शामिल करवाने को लेकर मुलाकात हुई। सीएम के निर्देशानुसार पर समाज कल्याण मंत्री से कल विस्तृत चर्चा हुई और एक सफ्ताह के अंदर निषाद पार्टी और समाज कल्याण मंत्रालय उत्तर प्रदेश, एक ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को भेजेगें।

सपा ने निषादों को बरगलाने का काम किया
निषाद ने बताया कि कल उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि हमारा मामला एक्सप्लेनेशन ( परिभाषित ) करने का है। किन्तु पूर्व की सरकारों ने मामले को उलझाने के लिए इन जातियों को परिभाषित करने की बजाय अलग से शामिल करने पर जोर दिया क्योंकि राज्य सरकार के पास अधिकार ही नहीं है किसी भी जाति को पिछड़ी से निकालकर अनुसूचित में डाल सके। फिर किस आधार से मुलायम सिंह ने 2005 में और अखिलेश ने 2016 में आरक्षण की अधिसूचना जारी करते आये हैं। यह सवाल तो अब समाजवादी पार्टी को देना है कि भोले भाले निषाद समाज को क्यों बरगला रहे थे? क्यों अंधेरे में रख रहे थे??












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