डॉक्टरों ने पैसा लगाकर सरकारी अस्पताल में बनाया बच्चों के लिए ICU
कानपुर में डॉक्टरों के प्रयास और डोनेशन से बच्चों के बचाने के लिए सरकारी अस्पताल में आईसीयू बनाया गया है।
कानपुर। कानपुर में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले कुछ डाक्टरों ने लाखों रुपये खर्च करके एक सरकारी अस्पताल में एनआईसीयू यानि बाल सघन चिकित्सा कक्ष स्थापित किया है। इससे हर साल काल के गाल में समाने वाले दो हजार से अधिक नवजात शिशुओं के प्राण बच पाएंगे।

नवजात शिशुओं की जिंदगी बचाने की बड़ी पहल
कानपुर मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध बाल रोग चिकित्सालय अपनी स्थापना के बाद से सरकारी बजट पर निर्भर था। बजट में कमी हुई तो सैंकड़ों बीमार नवजात शिशुओं को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। ऐसे में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डाक्टरों ने आपस में तय किया कि वे अपनी कमाई का एक हिस्सा जमा करके सरकारी बाल चिकित्सालय में अत्याधुनिक एनआईसीयू यानि नवजात शिशु सघन चिकित्सा कक्ष का निर्माण करायेगें।

एसी से लेकर दवाई तक का इंतजाम
इन निजी डाक्टरों के प्रयासों से अब सरकारी अस्पताल में एक एनआईसीयू तैयार है। इसकी शुरुआत दस बिस्तरों से हुई थी लेकिन जब डॉक्टरों की इन कोशिशों की गूंज यूनिसेफ जैसी संस्थाओं और केन्द्र सरकार तक पहुंची तो वे भी मदद को आगे आ गयी। अब यहां बिस्तरों की संख्या बढ़कर 25 हो गयी है और फोटोथेरेपी व कृत्रिम श्वास मशीन सहित तमाम अत्याधुनिक उपकरण हैं। अब यहां न तो टूटा फर्श है और न बरसात में टपकती छत। उमस भरी गर्मी दूर करने के लिये एअरकंडीशन लग चुके हैं।
देखिए डॉक्टरों की पहल पर यह वीडियो
गरीब बच्चों के लिये जो महंगी दवाएं अस्पताल में मौजूद नहीं होती हैं, उन्हें डाक्टरों के चन्दे से मंगाया जाता है। कभी इस अस्पताल में बाल मृत्यु दर का ग्राफ काफी ऊंचा हुआ करता था लेकिन एनआईसीयू बन जाने से अब यहां गरीब का बच्चा भी जिन्दगी की आस लगा सकता है।












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