यूपी: दलित मरीज को छूने के लिए सरकारी डॉक्टर ने मांगी 1000 रुपए फीस, न देने पर स्ट्रेचर से धकेला, मौत
लखनऊ। जहां कानून के तहत हर मरीज की जान बचाना डॉक्टर का कर्तव्य और चिकित्सा सुविधा पाना मरीज का मौलिक अधिकार हो, वहां इस तरह की घटना पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगाती हैं। यूपी के जौनपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने डॉक्टर जैसे पवित्र पेशे को शर्मसार कर दिया है। यहां एक अनुसूचित जाति के वृद्ध बीमार मरीज को पहले तो डॉक्टर व उनके स्टाफ ने छूने के लिए 1000 रूपये की मांगे। जब उसने इसका विरोध किया तो जातिसूचक शब्दों से अपमानित कर स्ट्रेचर से धकेल दिया गया जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक के रिश्तेदारों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है। रिश्तेदारों ने हत्या का आरोप लगाते हुए कोर्ट में दरखास दिया जिसके बाद कोर्ट ने डॉक्टर व उनके स्टाफ समेत छ: पर वाद दर्ज कर थाने से रिपोर्ट तलब किया।विस्तार से जानिए पूरा मामला

डॉक्टर ने कहा- तुम दलित हो, टच करने के 1000 लगेंगे
जानकारी के मुताबिक जौनपुर के मछलीशहर के परसूपुर के रहने वाले केशल प्रसाद अपने पिता नरेंद्र प्रसाद की इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आए थे। लेकिन उनका आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मछलीशहर के डॉक्टर ने उनके बुजुर्ग पिता को छूने से इनकार कर दिया। डॉक्टर ने मरीज को छूने के एवज में उनसे 1000 रुपए की डिमांड की। दरअसल डॉक्टर ने उनसे कहा कि वो दलित है इसलिए उसे छूने के लिए 1000 रुपए लगेंगे। पीड़ित केशव प्रसाद का कहना है कि बीते गुरुवार (17 मई) को वो अपने पिता को गंभीर हालत में लेकर सामुदियाक अस्पताल लेकर आए थे। केशव का कहना है कि हालत नाजुक होने की वजह से उन्होंने खुद अस्तपाल में अपने पिता को स्ट्रेचर पर लिटाया और फिर डॉक्टर से तुरंत उनका इलाज शुरू करने को कहा। लेकिन तब वहां मौजूद डॉक्टर ने जातिसूचक शब्दों के साथ उनका अपमान किया और मरीज को छूने के लिए पैसों की मांग रख दी।

विरोध करने पर स्ट्रेचर से धक्का दे दिया जिससे मौत हो गई
मरीज के रिश्तेदारों ने जब डॉक्टर की इस बात विरोध किया तो डॉक्टर भड़क गए। इतना ही केशव प्रसाद का यह भी आरोप है कि डॉक्टर ने स्ट्रेचर पर पड़े उनके पिता को जोर से धक्का दे दिया। जिसके बाद स्ट्रेचर से गिरने और आघात लगने से उनके पिता की वहीं पर मौत हो गई।

अस्पताल ने किया इनकार
केशव प्रसाद के मुताबिक उन्होंने इस मामले में थाना मछली शहर और पुलिस अधीक्षक को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन यहां उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद उसने सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के डॉक्टर पर हत्या का आरोप लगाते हुए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। इधर अस्पताल प्रशासन ने इस पूरी घटना से इनकार किया है।












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