गरीबों की तकदीर बदल रहे बुलंदशहर के डीएम, जानकर आप भी करेंगे सलाम
कूड़ा बीननेवाले और भीख मांगनेवाले बेहद गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए डीएम ने जो कदम उठाया है, वह काफी सराहनीय है।
बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में बेहद गरीबी में जीनेवाले बच्चों का भविष्य संवारने के लिए जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ऐसे बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया है जिन पर अभी तक समाजसेवी संगठनों और सरकार का ध्यान कभी नहीं गया। दो वक्त की रोटी के मोहताज कूड़ा बीनने वाले और भीख मांगनेवाले बच्चों की अंधेरी जिंदगी में डीएम, शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का काम रहे हैं ताकि उनका आनेवाला कल सुधर सके। Read Also: रेलवे प्लेटफॉर्म पर चलता है यह अनोखा स्कूल, गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं पुलिसवाले

गरीब बच्चों की जिंदगी में शिक्षा की रोशनी ला रहे डीएम
बुलंदशहर के डीएम ने बेहद गरीब बच्चों के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि खाने और कपड़े की व्यवस्था भी की है। बच्चों के परिजनों को डीएम और ब्रह्मकुमारी शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं। परिजनों को यह हिदायत भी दी गई है कि अगर किसी बच्चे को पढ़ने से रोकने की कोशिश की गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एक बच्ची रिहाना ने बताया 'स्कूल में आने से पहले हम कूड़ा बीनने का काम करते थे। हमने आज तक स्कूल की शक्ल तक नही देखी थी। लेकिन बुलंदशहर के डीएम ने हमारे लिए शिक्षा की व्यवस्था की है। डीएम साहब ने हमें कबाड़ से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया, साथ ही हमें कूड़ा बीनने से मना किया है।'

'पढ़ो-लिखो और अफसर बनकर गरीबों की मदद करो'
नसरीन ने बताया, 'डीएम ने सभी बच्चों को जागरूक करते हुए कहा कि वे पढ़-लिखकर अच्छी पोस्ट पर जाएं। अधिकारी बनकर गरीब जनता की मदद करें।' आज डीएम के प्रयास से यह बच्चे जिला प्रदर्शनी के लिए इस्तेमाल किए जानेवाले बैरन हॉल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और प्राइमरी स्कूल की टीचर व ब्रह्मकुमारी इन्हें शिक्षित करने में अपना समय दे रही हैं। ये गरीब बच्चे दिनभर कूड़ा बीनते थे और मां-बाप इनको पढ़ने के लिए भेजने को राजी नहीं थे। डीएम ने परिजनों को समझाया तब जाकर वे माने और बच्चों को शिक्षा पाने के लिए भेजने लगे।

डीएम के मिशन में ब्रह्मकुमारियों की मदद
ब्रह्मकुमारी निशा ने बताया 'जब हम बच्चों को लेने झुग्गी में गए थे, उस समय ये बहुत ही बुरी अवस्था में थे, इनमें से बदबू आ रही थी। बच्चों को सही तरह से खाना, बोलना कुछ नहीं आता था। जब हमने मां-बाप को बच्चे को पढ़ने भेजने के लिए कहा तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। जब हमने भगवान की आड़ लेकर उन्हें समझाया तो उन्हें समझ आ गया। 4 शिक्षकों की टीम बच्चों को पढाने का काम करती हैं और हम लोग बच्चों के अंदर नैतिकता लाने का कार्य कर रहे हैं।'













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