शाहजहांपुर: बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रशासन का अलर्ट मोड किया ऑन

शाहजहांपुर। इस वक्त देश बाढ़ का कहर झेल रहा है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के कई ऐसे गांव हैं जो बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नरौरा बैराज से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंच चुका है। जिसमे चार गांव डूब गए हैं। स्थिति तब और ज्यादा बिगड़ने की संभावना है जब बैराज से छोड़ा गया पानी रामगंगा नदी में पहुंचेगा। लेखपाल कानून गो समेत तीन कर्मचारियों की शिकायत मिलने पर उन्हें निलंबित करने के आदेश दिए गए हैं।

शाहजहांपुर: बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रशासन का अलर्ट मोड किया ऑन

मुरादाबाद बैराज से भी करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। आशंका जताई जा रही है कि छोड़े गए पानी से कई दर्जन गांव डूब सकते हैं और इससे भारी नुकसान भी हो सकता है। जिलाधिकारी और एसपी मय फोर्स के साथ बाढ़ पीड़ित गांव पहुंचे और जरूरी दिशानिर्देश दिए। लापरवाही बरतने वाले लेखपाल कानून गो समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कई गांव हो जाएंगे जलमग्न

कई गांव हो जाएंगे जलमग्न

दरअसल आज मिर्जापुर थाना क्षेत्र के ग्राम इब्राहिमपुर, इस्माईलपुर समेत चार गांवों का दौरा जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी और एसपी एस चिनप्पा ने किया है। नरौरा बैराज से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के चलते अब बाढ़ का खतरा बेहद बढ़ गया है। पहले ही इस इलाके के चार गांव बाढ़ की चपेट मे आ चुके हैं। गांव मे बाढ़ का पानी घुस चुका है और अब खतरा इसलिए ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि नरौरा बैराज से पानी छोड़े जाने से स्थिति और भी भयानक हो सकती है। जब बैराज से छोड़ा गया पानी नदी तक पहुंचेगा तो इलाके के कई गांव पानी में डूब जाएंगे।

अधिकारियों की लापरवाही पर उन्हें मिला निलंबन

अधिकारियों की लापरवाही पर उन्हें मिला निलंबन

इतना ही नहीं ग्रामीणों और अधिकारियों को डर मुरादाबाद से छोड़े गए पानी का भी है जो कुछ घंटो मे रामगंगा में पहुंच जाएगा। बाढ़ की डर के कारण जिलाधिकारी और एसपी ने गांव का दौरा किया जो गांव बाढ़ की चपेट मे आ चुके हैं या फिर चपेट मे आ सकते हैं। गांव में दौरे के दौरान जिलाधिकारी ने लेखपाल कानून गो और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी की बड़ी लापरवाही देखी जिसके चलते जिलाधिकारी ने उन्हें निलंबित करने के निर्देश दे दिए।

बिजली के तारों से है ग्रामीणों को सबसे ज्यादा खतरा

बिजली के तारों से है ग्रामीणों को सबसे ज्यादा खतरा

गांव मे 11 हजार की हाईटेंशन लाईन पानी से कुछ उपर ही झूल रही थी। जिससे कभी भी हादसा हो सकता था। ये देखकर जिलाधिकारी ने बिजली के पोल तत्काल सही करने के आदेश दिए। इसके अलावा गांव मे लेखपाल ने बाढ़ के चलते कोई भ्रमण नहीं किया। इस लापरवाही के चलते जिलाधिकारी ने लेखपाल और कानून गो को निलंबित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी ने ग्रामिणों को मोमबत्ती माचिस, पन्नी, के साथ साथ ग्रामिणों के लिए खाद्यान का भी इंतजाम करने करने के निर्देश दिए।

प्रशासन का अलर्ट मोड किया ऑन

प्रशासन का अलर्ट मोड किया ऑन

जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार बाढ़ कम आई है। पानी छोड़े जाने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और इसी खतरे को देखते हुए बाढ़ प्रभावित गांवों में बीस नावों का इंतजाम कर दिया गया है। साथ ही सभी गांव मे चौकी बनाई गई है और साथ ही उन्हें 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए है। ग्रामिणों को किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े इसके लिए एसडीएम समेत सभी अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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