क्या यूपी चुनाव में अप्रासंगिक हो गए अतीक, मुख्तार और डीपी यादव ?

लखनऊ, 28 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कई साल बाद पहली बार मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद अतीक अहमद जैसे बाहुबली नेता राजनीतिक पिच से बाहर हैं। जबकि किसी समय यह बाहुबली अपने साथ कई अन्य नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय करता था। हालांकि इन दोनों के अलावा कई और बाहुबली नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन अतीक और मुख्तार अपराध जगत की दुनिया में बड़े नाम हैं। हालांकि मुख्तार ने अपने बेटे को मऊ सदर सीट से मैदान में उतारा है और वह सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं अतीक अहमद ने पहले अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया था। लेकिन आखिरी वक्त में अतीक की पत्नी ने अपना नाम वापस ले लिया।

अखिलेश यादव

पांच बार विधायक रहे अतीक जेल में

सबसे पहले बात करते हैं अतीक अहमद की, जिन्होंने पश्चिमी प्रयागराज सीट से पांच बार विधानसभा चुनाव जीता था। अतीक अहमद गुजरात की एक जेल में बंद है और उसका भाई भी फरार है। वहीं उनकी पत्नी ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से उम्मीदवार बनाया था लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। इसके साथ ही अतीक का एक बेटा भी फरार है जबकि दूसरा बेटा जेल में है। जिसके बाद अतीक की पत्नी ने राजनीतिक क्षेत्र से दूरी बना ली। इसके साथ ही डीपी यादव सांसद और विधायक रह चुके हैं और इस बार वे चुनाव लड़ने की तैयारी में थे लेकिन अब उनके बेटे कुणाल चुनाव लड़ रहे हैं।

मुख्तार अपने बेटे को लड़ा रहे हैं चुनाव

मुख्तार अंसारी विधानसभा के मौजूदा सदस्य हैं और लंबे समय से बांदा जेल में हैं. वह कई वर्षों के बाद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। फिलहाल उनके बड़े बेटे अब्बास अंसारी सुभासपा के टिकट पर मऊ सदर से राजनीतिक मैदान में हैं। मऊ सदर से मुख्तार अंसारी कई बार चुनाव जीतते रहे हैं और इस बार उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। करीबी सूत्रों की माने तो मुख्तार के पास दो रास्ते हैं या तो वह एमएलसी का चुनाव लड़ सकते हैं या फिर 2024 में मऊ से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं।

विजय मिश्रा और धनंजय सिंह भी राजनीतिक क्षेत्र में हैं

वहीं आगरा जेल में बंद विजय मिश्रा भी विधायक हैं और ज्ञानपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके साथ ही धनंजय सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं। वह जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। जदयू ने उन्हें मल्हनी सीट से टिकट दिया है। इसके साथ ही अभय सिंह और अमनमणि त्रिपाठी समेत कई बाहुबली नेता राजनीतिक क्षेत्र में हैं। ये बाहुबली अपनी अपनी सीटों पर अच्छी पकड़ रखते हैं और जोड़ तोड़ की सरकार में ये बाहुबली काफी कारगार साबित होते हैं।

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