घोषी उपचुनाव में करारी हार के बाद भी दारा सिंह चौहान बने मंत्री, लेकिन करना पड़ा लंबा इंतजार
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में 2017 में मंत्री रहने के बाद 2022 में चुनाव से पहले सपा में शामिल हुए दारा सिंह चौहान को सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद एक बार फिर मंत्री बनाया गया है। बीजेपी में आने के पर लंबे इंतजार के बाद दारा सिंह चौहान ने मंगलवार को शपथ ली।
घोसी उपचुनाव में करारी हार के बाद काफी समय तक दारा सिंह ने इंतजार किया। अब मंगलवार को दारा सिंह चौहान ने जब मंत्री पद की शपथ ली तो लोगों ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा उन्हें उनके सब्र का फल दिया गया है।

वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भले ही दारा सिंह चौहान घोसी में हुए उपचुनाव में हार गए थे लेकिन पूर्वांचल समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य जनपदों में चौहान जातियों की अच्छी खासी संख्या है। इसके अलावा दारा सिंह चौहान की पिछड़ी जातियों में अच्छी पकड़ है।
ऐसे में योगी सरकार मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उनकाे मंत्रिमंडल में जगह देने के बाद भारतीय जनता पार्टी को आगामी लोकसभा चुनाव में ओबीसी वोटरों को अपने पक्ष में साधने में आसानी होगी तथा दारा सिंह चौहान के मंत्री बनने का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा।
ओबीसी वोटर हैं जरुरी
वरिष्ठ पत्रकार विनय मौर्य बताते हैं कि बीते चुनाव के आंकड़ों पर यदि ध्यान दिया जाए तो मोदी लहर होने के बावजूद साल 2014 और 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के जीत का अंतर काफी कम हुआ था।
ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ओबीसी वोटरों को अपने पक्ष में करने का पूरा प्रयास कर रही है। यही कारण है कि आजमगढ़ से दिनेश लाल यादव निरहुआ को चुनाव मैदान में उतर गया और आजमगढ़ लोकसभा में दिनेश लाल की जीत हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि इसी सिलसिले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए बुलाया जा रहा है, ताकि यादव मतदाताओं को अपनी तरफ लाया जा सके। वहीं गैर-यादव ओबीसी को अपने पक्ष में लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी अन्य ओबीसी नेताओं को भी तवज्जो दे रही है। इसी का नतीजा है कि दारा सिंह चौहान को कैबिनेट में जगह दी गई।












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