दूसरे चरण की 55 सीटों पर दलित और मुस्लिम तय करेंगे हवा का रुख, ये है वजहें
लखनऊ, 11 फरवरी: उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण में शामिल जिलों में मुस्लिम और दलित मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है, जिससे सपा को मुस्लिम सीटों का फायदा मिल सकता है। दूसरे चरण का मतदान 14 फरवरी को होना है। जिससे सियासी पारा चढ़ रहा है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण में नौ जिलों सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर की 55 सीटों पर मतदान होगा। इन सीटों पर मुस्लिम और दलित आबादी को देखते हुए पहले चरण की तुलना में सभी पार्टियों के लिए यह चुनाव ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। 25 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जबकि 20 सीटों पर दलित वोटरों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। इन जिलों में समाजवादी और रालोद गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, वहीं बीजेपी को किसानों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।

2017 में 11 मुस्लिम प्रत्याशी बने विधायक
2017 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 9 जिलों की 55 सीटों में से 11 मुस्लिम उम्मीदवारों ने समाजवादी पार्टी से चुनाव जीता था। जिसमें मुरादाबाद जिले की छह में से चार सीटों पर सपा के मुस्लिम उम्मीदवार ने जीत हासिल की। मोदी लहर के बावजूद दूसरे चरण की इन सीटों पर सपा ने 27 सीटों पर जीत हासिल की। जबकि बीजेपी को 13 और बसपा ने 11 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2012 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने 27 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को सिर्फ 8 सीटें मिली थीं।
सपा-बसपा की मजबूत पकड़
दूसरे चरण में शामिल विधानसभा सीटों में मुस्लिम और दलित वोटरों के चलते सपा और बसपा की पकड़ मजबूत रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सपा ने बसपा और रालोद के साथ गठबंधन किया था। इसके बाद बसपा ने 11 में से चार सीटों- अमरोहा, बिजनौर, नगीना और सहारनपुर पर जीत हासिल की, जबकि सपा ने रामपुर, मुरादाबाद और संभल में जीत हासिल की। इन सात जिलों में 35 सीटें जीतने में दलित और मुस्लिम आबादी को अहम कारक माना जा रहा है, वहीं जाट और ओबीसी वोटरों की संख्या भी काफी है. दूसरी ओर, बदायूं यादव बहुल जिला माना जाता है, जिसके कारण इसे सपा का गढ़ माना जाता है।

पश्चिम में इस बार नहीं है मोदी लहर
2017 के विधानसभा चुनाव में पूरे पश्चिमी यूपी में मोदी लहर देखने को मिली थी। कैराना और मुजफ्फरनगर दंगों के मुद्दे पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण भाजपा अपने पक्ष में हिंदू वोट हासिल करने में सफल रही। वहीं, इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। इस चुनाव में फसलों की खरीद न होने और गन्ना बकाया भुगतान में देरी से किसान भाजपा से खफा हैं। वहीं, थाना स्तर पर भ्रष्टाचार से जनता तंग आ चुकी है। बेरोजगारी भी यहां एक बड़ा मुद्दा है। किसान आंदोलन का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी देखा जा सकता है।
बीजेपी को होगा नुकसान
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राज बहादुर सिंह का कहना है कि दूसरे चरण में शामिल जिलों में मुस्लिम और दलित मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। वहीं इस चरण में रालोद का असर कम दिखाई दे रहा है। इससे सपा को मुस्लिम सीटों पर फायदा मिल सकता है। जबकि अन्य सीटों पर बीजेपी को फायदा होगा. 2017 के विधानसभा चुनाव में गैर-मुस्लिम सीटों पर बीजेपी को बड़ा फायदा हुआ था, लेकिन पिछली बार के मुकाबले इस बार कुछ सीटों पर नुकसान हो सकता है।












Click it and Unblock the Notifications