गाय घोषित हो राष्ट्रीय पशु, गोरक्षा को बनाया जाए हिंदुओं का मौलिक अधिकार: इलाहाबाद HC
नई दिल्ली, 1 सितंबर: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को गाय की हत्या से जुड़े एक मामले में सुनवाई की। साथ ही उसके आरोपी जावेद को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए और गोरक्षा को हिंदुओं के मौलिक अधिकार के रूप में रखा जाना चाहिए। मौलिक अधिकार केवल बीफ खाने वालों का ही नहीं है, बल्कि जो गाय की पूजा करते हैं और आर्थिक रूप से गायों पर निर्भर हैं, उन्हें भी सार्थक जीवन जीने का अधिकार है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति शेखर यादव की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि हम जानते हैं कि जब किसी देश की संस्कृति और उसकी आस्था को ठेस पहुंचती है, तो देश कमजोर हो जाता है। जांच में पता चला कि आरोपी ने गाय चोरी की। उसके बाद उसका सिर काटकर हत्या कर दी और मांस भी उसके साथ रखा था। ये आरोपी का पहला अपराध नहीं है। उसने पहले भी ऐसा ही किया था, जिसकी वजह से समाज में सद्भाव बिगड़ा। वहीं जमानत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर वो बाहर गया, तो दोबारा से ऐसा कृत्य कर सकता है।
आरोपी पर आईपीसी की धारा 379 (चोरी की सजा) और गोहत्या रोकथाम अधिनियम की धारा 3, 5, 8 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि जीवन का अधिकार मारने के अधिकार से ऊपर है और गोमांस खाने के अधिकार को कभी भी मौलिक अधिकार नहीं माना जा सकता है। गाय जब बूढ़ी हो जाती है, तो उसका गोबर-मूत्र दवा और कृषि के लिए उपयोगी होता है। ऐसे में उसे मारने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता है।
इतिहास की बात करते हुए खंडपीठ ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल हिंदू ही गायों के महत्व को समझते हैं, पांच मुस्लिम शासक ऐसे थे, जिन्होंने गाय मारने पर प्रतिबंध लगा रखा था। जिसमें बाबर, हुमायूँ और अकबर का नाम शामिल है। इसके अलावा मैसूर के नवाब हैदर अली ने गोहत्या को दंडनीय अपराध बना दिया था। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो गायों के हित के लिए कानून बनाए।












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