UP में जातीय समीकरण साधकर Congress ने खेला बड़ा दांव, 2024 में BJP को काउंटर करने की कोशिश

लखनऊ, 01 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा में कांग्रेस (Congress) को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। यूपी में मिली चुनावी हार के बाद से ही कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता निराशा के भवर में फेस हुए थे। दिल्ली से लेकर राजस्थान तक कांग्रेस में चल रही उठापटक के बीच पार्टी ने 2024 के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए शनिवार को बड़ा दांव खेल दिया। कांग्रेस ने यूपी दलित की कमान सौंपकर बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। जबकि 6 प्रांतीय अध्यक्ष का ऐलान कर एकसाथ कई जातीय समीकरण साधने का प्रयास किया है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कांग्रेस ने जिस तरह से एक अध्यक्ष और 6 प्रांतीय अध्यक्ष बनाकर अलग-अलग जातियों को साधने का दांव खेला है वो बीजेपी की टेंशन बढ़ा सकता है।

दलित अध्यक्ष बनाकर बीएसपी को जवाब देने की तैयारी

दलित अध्यक्ष बनाकर बीएसपी को जवाब देने की तैयारी

कांग्रेस ने दलित नेता बृजलाल खबरी को अध्यक्ष बनाकर यूपी में दलित समीकरण साधने का प्रयास किया है। बीजेपी ने भी दलितों को साधने के लिए योगी सरकार में असीम अरुण और बेबिरानी मौर्य को मंत्रिमंडल में शामिल किया था। बीजेपी के नेताओं का दावा था की आगरा मंडल में जाटव समाज का वोट बीजेपी को मिला। बेबी रानी भी चूंकि आगरा से आती हैं तो उनको मंत्री बनाकर बीजेपी ने अपना समीकरण साध था। इसी तरह अब कांग्रेस ने लंबे अरसे बाद दलित को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा दाव खेला है। दलित अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस अब मायावती को बेहतर तरीके से जवाब दे सकेगी।

आम चुनाव से पहले ब्राह्मण समीकरण पर भी फोकस

आम चुनाव से पहले ब्राह्मण समीकरण पर भी फोकस

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद ही लगातार इस बात की चर्चाएं चल रही थीं कि कांग्रेस प्रमोद तिवारी या किसी ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। प्रमोद के अलावा राजेश मिश्रा का नाम भी सामने आ रहा था लेकिन कांग्रेस ने दलित को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। हालाकि 6 प्रांतीय अध्यक्ष में 2 ब्राह्मण चेहरे को शामिल कर इस कमी को पूरा करने का प्रयास किया गया है। जिन 2 चेहरों को प्रांतीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है उसमे नकुल दुबे और योगेश दीक्षित को प्रांतीय अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा गया है। दो ब्राह्मणों को कमान देने के पीछे कांग्रेस का मकसद साफ है कि वह यूपी में ब्राहृण फैक्टर को नजरअंदाज नहीं करना चाही है। इससे पहले राज्यसभा के चुनाव के दौरान यूपी केप्रतापगढ़ से कद्दावर नेता प्रमोद तिवारी को संसद भेजा गया था।

नसीमद्ददीन को शामिल कर मुस्लिम को रिझाने का प्रयास

नसीमद्ददीन को शामिल कर मुस्लिम को रिझाने का प्रयास

कांग्रेस ने बसपा छोड़कर आए कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दिकी को प्रांतीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। नसीमदु्दीन हमेशा से ही प्रियंका गांधी के करीबीयों में गिने जाते रहे हैं। नसीमुद्दीन जब बसपा में थे तो वो यूपी में एक बड़ा मुस्लिम चेहरा थे। बाद में जब मायावती सत्ता से बाहर हो गईं तो नसीमुद्दीन ने भी उनका साथ छोड़ दिया और उनपर टिकट बेचने का आरोप लगाकर बसपा से किनारा कर लिया। इसके बाद वह अपनी सियासत को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि कांग्रेंस ने उनको अहम जिम्मेदारी दे रखी थी लेकिन नसीमुद्दीन को प्रांतीय अध्यक्ष बनाकर संगठन कोर ग्रुप में मुस्लिम का प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।

अजय राय को बड़ा पद देकर पूर्वांचल में भूमिहारों को साधने का प्रयास

अजय राय को बड़ा पद देकर पूर्वांचल में भूमिहारों को साधने का प्रयास

काशी से पीएम मोदी के खिलाफ दो बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पांच बार के विधायक अजय राय को बड़ी जिम्मेदारी दी है। हालांकि ऐसी अटकलें लगाईं जा रहीं थीं कि अजय राय को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है लेकिन उनको प्रांतीय अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल में भूमिहार समाज को साधने की कोशिश की गई। अजय राय पूर्वांचल में भूमिहारों के दिग्गज नेता माने जाते हैं। वह पहले बीजेपी में भी रह चुके हैं। बीजेपी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी को अलविदा कह दिया था। अजय राय की शख्सियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रियंका गांधी ने अपनी रैली के शुरुआत बनारस से ही की थी। बनारस और उसके आसपास के दर्जन भर जिलों में भूमिहार समाज का काफी प्रभाव है इसको देखते हुए कांग्रेस ने यह दांव खेला है।

अखिलेश यादव के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश

अखिलेश यादव के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश

कांग्रेस ने कद्दावर नेता अनिल यादव को प्रांतीय अध्यक्ष बनाकर यादवलैँड को साधने का प्रयास किया है। यादवलैंड यानी इटावा और उसके आसपास के करीब आधा दर्जन जिलों में मुलायम परिवार का ही राज चलता है। हालांकि बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में कन्नौज की सीट उनसे छीन ली थी लेकिन इसके बाद भी यादवलैंड में अभी अखिलेश का ही दबदबा है। वह करहल से चुनाव लड़कर इसका प्रमाण भी दे चुके हैं। अनिल यादव के बहाने कांग्रेस की नजर यादव लैंड में कांग्रेस को खड़ा करने पर है। कांग्रेस के पदाधिकारियों की माने तो कांग्रेस के इस फैसले से काफी लाभ मिलेगा।

बीरेंद्र चौधरी के बहाने ओबीसी समुदाय पर नजर

बीरेंद्र चौधरी के बहाने ओबीसी समुदाय पर नजर

वीरेंद्र चौधरी को कांग्रेस ने 6 प्रांतीय अध्यक्षों की सूची में शामिल किया है। बीरेंद्र चौधरी फिलहाल फरेंदा से विधायक हैं। विधानसभा में कांग्रेस को केवल दो सीटों पर ही जीत मिली थी। एक सीट रामपुर खास से प्रमोद तिवारी की बेटी अराधना मिश्रा मोना जीती थीं और दूसरी फरेंदा से बीरेंद्र चौधरी। अराधना मिश्रा को कांग्रेस ने विधानसभा में कांग्रेस का नेता बनाया था। अब वीरेंद्र चोधरी को प्रांतीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर ओबीसी समुदाय को साधने का प्रयास किया है। वीरेंद्र चौधरी अपने इलाके में जनता के बीच काफी लोकप्रिय है लेकिन वो पूरे प्रदेश में कांग्रेस का ओबीसी चेहरा बन पाएंगे या नहीं ये देखना दिलचस्प होगा।

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