प्रियंका की अगुवाई में भी 387 सीटों पर कांग्रेस की नहीं बची लाज, बीजेपी की इन 3 सीटों पर जमानतें जब्त
लखनऊ, 13 मार्च: कांग्रेस ने इसबार यूपी चुनाव में पूरा दम लगाया था। पिछले कई चुनावों में राहुल गांधी के नेतृत्व की नाकामी के बाद एक तरह से प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी ने औपचारिक तौर पर लॉन्च किया था। खुद प्रियंका भी अपने को चुनावों में पार्टी का मुख्य चेहरा बता चुकी थीं। चुनाव जीतने की स्थिति में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने तक की चर्चा हो रही थी। लेकिन, कांग्रेस ने सूबे में इतना खराब प्रदर्शन किया, जितना आजादी के बाद से अभी तक कभी नहीं किया था। पार्टी की 387 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। यह किसी भी पार्टी के लिए सबसे बड़ी संख्या है। पार्टी के दो उम्मीदवार जीतकर विधानसभा जरूर पहुंचे, लेकिन कुल मिलाकर प्रदर्शन बहुत ही शर्मनाक रहा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी जो भारी बहुत से सत्ता पर दोबारा काबिज हुई है, उसके भी उम्मीदवार कम से कम तीन सीटों पर अपनी जमानत बचा पाने में असफल हो गए हैं।

यूपी में 387 सीटों पर कांग्रेस की नहीं बची लाज
कांग्रेस महासचिव और यूपी में पार्टी की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस चुनाव में अपनी तरफ से पूरा जोर लगाया था। 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' के नारे का खूब प्रचार किया गया। 40% महिलाओं को टिकट देने की बात भी जोर-शोर से बताई गई। एकबार प्रियंका गांधी से चुनाव में पार्टी के चेहरे को लेकर सवाल पूछ लिया गया तो उन्होंने कहा कि मैं हूं, क्या मेरा चेहरा नहीं दिख रहा है। पार्टी ने इसबार कई लोक लुभावन वादे भी किए थे। लेकिन, फिर भी पार्टी के 97% उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। कांग्रेस ने 403 सीटों वाली यूपी विधानसभा चुनाव में 399 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे और उनमें से 387 सीटों पर वह जमानत नहीं बचा सकी। सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी होने का दम भरने वाली कांग्रेस के लिए इससे शर्मनाक स्थिति क्या हो सकती है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी जिन 95 सीटों पर चुनाव लड़ी है, उन सीटों पर कांग्रेस को एआईएमआईएम के उम्मीदवारों के मुकाबले करीब एक-तिहाई से भी कम वोट मिल पाए हैं।

बसपा 290 सीटों पर नहीं बचा सकी जमानत
भले ही कांग्रेस को इस चुनाव में दो सीटें मिली हैं और वह इस मामले में बसपा से आगे रही है, लेकिन जमानत बचाने के मामले में मायावती की पार्टी ने कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन जरूर किया है। बीएसपी ने सभी 403 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और 72% यानि 290 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हुई है। वैसे कांग्रेस और बसपा के रिकॉर्ड जमानत जब्त होने के मामले में निर्दलीयों की तुलना में जरूर ठीक की कही जा सकती है। इस बार कुल 1,019 निर्दलीय प्रत्याशियों ने उत्तर प्रदेश में अपनी किस्मत आजमाई थी, जिनमें से 99.7% यानि 1,016 उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा सके।

बीजेपी से दोगुनी सीटों पर सपा की जमानत जब्त
जमानत नहीं बचा पाने वाली पार्टियों में समाजवादी पार्टी और उसकी सहयोगी आरएलडी और सुभासपा भी शामिल हैं। अखिलेश यादव की सपा कुल 347 सीटों पर लड़ी और 6 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इसी तरह जयंत चौधरी की रालोद ने 33 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और उनमें से 3 पर उसकी जमानत जब्त हो गई। ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को अखिलेश ने 19 सीटें दिए थे, जिनमें से 5 पर उसकी जमानत नहीं बच सकी।

बीजेपी की इन 3 सीटों पर जमानतें जब्त
जमानत नहीं बचा पाने वाली पार्टियों में यूपी की सत्ता में बंपर बहुत से दोबारा लौटी भारतीय जनता पार्टी भी शामिल है, जिसके उम्मीदवारों की तीन सीटों पर लाज नहीं बची है। पार्टी ने कुल 376 उम्मीदवार खड़े किए थे। जिन सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों को जमानत बचाने लायक भी वोट नहीं मिले, वे हैं- प्रतापगढ़ की कुंडा सीट, जहां पार्टी प्रत्याशी सिंधुजा मिश्रा सेनानी को सिर्फ 8.36% वोट मिले। इसी तरह जौनपुर की मल्हनी सीट पर बीजेपी उम्मीदवार कृष्णा प्रताप सिंह को सिर्फ 8.01% वोट मिले। इसके अलावा तीसरी सीट है, बलिया की रसड़ा विधानसभा जहां भाजपा प्रत्याशी बब्बन की जमानत नहीं बच सकी।

भाजपा के सहयोगी दल 100 नंबर से पास
हालांकि, सभी बड़े दलों में बीजेपी का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है और उसके सिर्फ 0.8% उम्मीदवारों ने ही लाज गंवाई है, जबकि सपा के ऐसे उम्मीदवारों का प्रतिशत 1.7 है। लेकिन, भाजपा के बाकी दोनों सहयोगियों अपना दल(सोनेलाल) और निषाद पार्टी का रिकॉर्ड इस मामने अपनी बड़ी पार्टनर से भी अच्छा है और उनके प्रत्याशियों की एक भी सीट पर जमानत जब्त नहीं हुई है।












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