हाथ छुड़ाकर कमल का फूल पकड़ सकते हैं ये बड़े कांग्रेसी नेता, बीजेपी वाले ने खेल बिगाड़ा!
भाजपा छोड़कर कांग्रेस आए विजय मिश्रा को प्रत्याशी बनाने पर उपेंद्र सिंह ने खुल्लम खुल्ला विरोध किया था और अपने पद से इस्तीफे के लिए भी प्रदेश कमेटी को पत्र लिखा था।
इलाहाबाद। नगर निकाय चुनाव के पहले इलाहाबाद में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में महानगर अध्यक्ष उपेंद्र सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया है। फिलहाल उपेंद्र सिंह भाजपा के संपर्क में हैं और सियासी गुणागणित कहती है कि वो भाजपा का दामन थाम लेंगे। इस विवाद के पीछे सबसे बड़ा कारण रहा कि कांग्रेस द्वारा विजय मिश्रा को महापौर का टिकट दिया जाना। भाजपा छोड़कर कांग्रेस आए विजय मिश्रा को प्रत्याशी बनाने पर उपेंद्र सिंह ने खुल्लम खुल्ला विरोध किया था और अपने पद से इस्तीफे के लिए भी प्रदेश कमेटी को पत्र लिखा था। टिकट वितरण से नाराज चल रहे उपेंद्र ने हर बड़े नेता के आने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की, जो बड़े नेताओं को लगातार नागवार गुजर रही थी। इसी के चलते उपेंद्र को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्राथमिक सदस्यता से भी 6 वर्ष के लिए बर्खास्त कर दिया।

बड़े और पुराने नेता
उपेंद्र सिंह शुरू से ही जमीनी नेता के रूप में कांग्रेसी रहे और इलाहाबाद के प्रथम पंक्ति के नेता माने जाते हैं। कांग्रेस के बड़े आयोजनों में मंच पर उपस्थिति और पद के साथ उनका कद मौजूदा समय में काफी असरदार है। इस बार महापौर टिकट की दावेदारी में उन्होंने भी अपना नाम आगे किया था और उसकी चर्चा भी थी, लेकिन एकाएक विजय मिश्रा भाजपा छोड़कर आए और पूरी सियासत ही बिगड़ गई। अंदर-अंदर तो बहुत से नेताओं ने विजय मिश्र का विरोध किया लेकिन सबने उपेंद्र को आगे कर अपनी गोटी चली।

नतीजा उपेंद्र सिंह सामने रहे, निशाना बने और पार्टी से भी बाहर कर दिए गए। अगर ऐसे में उपेंद्र भाजपा में जाते हैं तो कांग्रेस को नुकसान होगा, जिसे भाजपा भुनाने में चूकना नहीं चाहेगी, वैसे उपेंद्र सिंह के पास भी कमल का साथ देने के अलावा दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा, ऐसे में बिना शर्त ही उपेंद्र सिंह भाजपा थाम सकते हैं।












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