प्लास्टिकनुमा है इस बेबी की स्किन, डॉक्टर बोले- रोया तो फट सकती है स्किन

बहराइच। यूपी के बहराइच में पहला कोलोडियन बेबी सामने आया है। बच्चे को इलाज के लिए निजी नर्सिंग होम में भर्ती करवाया गया है। हालांकि उसे अभी लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। बच्चे के शरीर पर सामान्य चमड़ी की जगह प्लास्टिक रूपी आवरण है। डॉक्टर्स इसे क्रोमोसोम की समस्या बता रहे हैं। ऐसी संक्रमित बीमारी रेयर ऑफ द रेयरेस्ट की कैटिगरी में आती है। ऐसे बच्चों की स्किन प्लास्टिकनुमा होती है जो उसके रोने से भी फट सकती है।

श्रावस्ती में पैदा हुआ था कोलोडियन बेबी

श्रावस्ती में पैदा हुआ था कोलोडियन बेबी

बलरामपुर जिले के हरैया थाना क्षेत्र के चौधरीडीह बिनहौनी कला गांव निवासी अनीता देवी (23) को गुरुवार दोपहर में प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो पति अलखराम ने पत्नी को प्रसव के लिए श्रावस्ती जिले के सिरसिया में स्थित बालापुर उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यहां पर अनीता ने बेटे को जन्म दिया। लेकिन डॉक्टरों ने जैसे ही बताया कि उसकी खाल प्लास्टिकनुमा है। उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है। इसके बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां के डॉक्टरों के भी हाथ खड़े करने पर अलखराम नवजात को लेकर बलरामपुर जिला अस्पताल पहुंचे। बाद में बहराइच जिला अस्पताल में भी डॉक्टरों ने असमर्थता जता दी। इस पर अलखराम ने नवजात को महेश पॉली क्लीनिक में दिखाया। जहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिशिर अग्रवाल नवजात को देखकर दंग रहे गए। बोले यह कोलोडियन बेबी है। यह काफी रेयर केस है। इलाके में यह अब तक का पहला मामला है।

लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर कोलोडियन बेबी

लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर कोलोडियन बेबी

डॉ. शिशिर ने बताया कि कोलोडियन बेबी को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखकर इलाज शुरू किया गया है। निरंतर इलाज से बच्चे की हालत में सुधार की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जेनेटिक डिसार्डर से कोलोडियन नामक बीमारी नवजात में होती है। लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर विशेष जेली लगाकर उसे आईसोलेशन वार्ड में रखा गया है। नवजात को ऐसी स्थिति में संक्रमण का भी खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि सीनियर्स से भी बातचीत की जा रही है।

अमृतसर में मिला था पहला कोलोडियन

अमृतसर में मिला था पहला कोलोडियन

डॉ. शिशिर अग्रवाल ने बताया कि अमृतसर में आधे दशक पूर्व कोलोडियन बेबी मिला था। लता मंगेशकर अस्पताल नागपुर में भी एक कोलोडियन बेबी का मामला सामने आया था। उन्होंने कहा कि यह दुर्लभ किस्म की बीमारी है। मेडिकल साइंस में रिसर्च चल रही है।

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