यूपी के 'तीन कलशा वाले महंत' का राजनीति में कदम, SP को चटाई धूल, सीएम योगी के सपनों को लगाएंगे पंख
यूपी की सभी महापौर की सीटें भाजपा के खाते में आई हैं। लेकिन अयोध्या में पिछले महापौर पर जमीन की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद मेयर प्रत्याशी का चेहरा बदलना तय था।

यूपी के पूर्वांचल की सीमा पर स्थित अयोध्या जनपद लंबे समय से राजनीति के केंद्र में रहा है। वजह यहां का धर्म आधारित विवाद था, जिसके आड़ में चाहे भाजपा हो या फिर कांग्रेस और सपा सभी ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी। लेकिन अब श्री राम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के साथ भाजपा को अयोध्या का पूरा प्यार मिल रहा है।
योगी सरकार के अयोध्या नगर पालिका को नगर निगम निगम में बदलने के बाद दूसरी बार निकाय चुनाव में भी भाजपा ने बाजी मारी। हालांकि इस बार कई ऐसे मु्द्दे थे, जिन पर भाजपा बैकफुट पर थी। ऐसे मे पार्टी ने एक ऐसे चेहरे को मेयर पद के लिए चुना, जिसके खिलाफ उंगली उठाने के लिए किसी के पास कोई तथ्य ही ना हो। ऐसे में पिछले मेयर पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप धरे के धरे रह गए और बीजेपी ने एक बार फिर से भारी मतों से विजयश्री हसिल कर ली।
मेयर चेहरा बदलने अहम वजह
योगी सरकार राम की पैड़ी यानी रामनगरी के प्रवेश द्वार तक ही अपने विकास कार्यक्रम को सीमित रखना नहीं चाहती। सरकार पूरी अयोध्या क्षेत्र का विकास चाहती है। पिछले कई वर्षों में अयोध्यावासियों ने ऐसी सरकार देखी जिसका विशेष ध्यान अयोध्या पर रहा हो, इसकी कई वजहें हो सकती हैं। लेकिन इनमें अयोध्या का विकास पहली वजह है। अयोध्या मेयर पद के लिए भाजपा के चेहरा बदलने के पीछे बड़ी वजह थी। भाजपा अयोध्या में मंदिर के निर्माण के दौरान किसी भी विवाद को हवा देने के मूड में नहीं है। ऐसे जमीन को को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते ही ऋषिकेश उपाध्याय को दूसरी बार मौका नहीं मिला।
संतों महंतों ने चला इमोशनल दांव
अयोध्या निकाय चुनाव के दौरान संतों महंतों तिवारी मंदिर के महंत व बीजेपी मेयर प्रत्याशी महंत गिरीशपति त्रिपाठी के साथ खड़े दिखे। सीएम योगी ने मंच से गिरीशपति त्रिपाठी के समर्थन में कहा कि अयोध्या में जिन लोगों ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं उन्हें दोबारा सत्ता में आने का मौका नहीं देना चाहिए। सीएम के इस बयान के बाद अयोध्या में निकाय चुनाव के दौरान एक फिर से सपा के खिलाफ कैंपेन चल पड़ा।
33,625 मतों से सपा को मात
कारसेवकों को गोली चलने की याद दिलाकर भाजपा ने एक बार फिर विक्टिम कार्ड खेला। ऐसे में भाजपा मेयर प्रत्याशी गिरीशपति त्रिपाठी को 47.92 फीसदी वोट यानी कुल 75,456 मत प्राप्त हुए। जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा मेयर प्रत्याशी आशीष पांडेय को 41,831 वोट मिले। बीजेपी ने यहां 33,625 वोटों से जीत दर्ज की।
भव्य अयोध्या का मुद्दा हावी
अयोध्या का विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उच्च प्राथमिकताओं में है। रामनगरी में मंदिर निर्माण के साथ पर्यटन के लिए क्या शह क्या गांव भव्य तरीके सजाने संवारने का प्लान है। अयोध्या शरह के आसपास 84 किलोमीटर की परिधि में योगी सरकार की कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। अयोध्या के मसौधा में स्थित चीन मिल, मंडल कारागार समेत इंडिस्ट्रियल एरिया को शहर से दूसर बसाने का प्रस्ताव है। अयोध्या फैजाबाद शहरों को सिर्फ और सिर्फ पर्यटन और आवासीय दृष्टि से सुविधा संपन्न बनाने की योजना है। इसके अलावा अयोध्या को रेल, रोड के अलावा एयर कनेक्टिविटी के लिए श्रीराम एयरपोर्ट लगभग बनकर तैयार हो चुका है। अयोध्या में इंटरनेशनल बस टर्मिनल से यात्री सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। योगी सरकार के कार्यकाल के दौरान राम मंदिर के साथ विकास कार्य अयोध्या में चुनावों को भाजपा के पक्ष में ले जाते हैं।
'तीन कलशा' वाले क्यों कहे जाते हैं गिरीशपति
अयोध्या में गिरीशपति त्रिपाठी तिवारी मंदिर के महंत हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में ग्रेजुएट किया है। वे एक राजनीतिक परिवार से हैं। उनके पिता नगरपालिका की राजनीति में सक्रिय रहे। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने 1989 में अध्यक्ष पद के लिए भी चुनाव लड़ा था। तिवारी मंदिर के तीन सिरों पर दूर से लगा कलश लगा देखा जा सकता है। उनके मंदिर के ऊपर तीन कलश लगे होने के वहज से उन्हें तीन कलशा वाले महंत कहा जाता है।
विवादों में रहे पिछले मेयर
अयोध्या के पहले मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का कार्यकाल विवादों में बीता। हालांकि इस दौरान अयोध्या में सरकार ने कई विकास कार्य शुरू किए। जब ऋषिकेश मेयर बने तो अयोध्या नगर निगम का गठन ही हुआ था, बाद में नगर निगम में शहर के आसपास 41 गावों को शामिल किया गया। जिनमें कई सारी राज्य सरकार की विकास योजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
ट्रस्ट जमीन खरीद भ्रष्टाचार में नाम
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मेयर ऋषिकेश उपाध्याय पर राम मंदिर ट्रस्ट के साथ जमीन खरीद में घोटाले के आरोप लगे, जिसेक बाद वे सुर्खियों में आए। सफाई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद भी उन्हें तीखा विरोध झेलना पड़ा। आरोप लगे कि मेयर ऋषिकेश उपाध्याय अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ सामंजस्य नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में नगर निगम के मेयर होने के वावजूद अधिकारी व कर्मचारी उनके असंतुष्ट हैं।














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