सीएम योगी आदित्यनाथ ने उस्ताद बिस्मिल्ला खान को जयंती पर दी श्रद्धांजलि
महान शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की आज जयंती है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके उस्ताद बिस्मिल्ला खां को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री नो सोशल मीडिया पर लिखा 'भारत रत्न' उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ ने शहनाई वादन को साधना एवं आराधना के रूप में आत्मसात किया। उनकी शहनाई से प्रस्फुटित अद्भुत स्वर भारत की अलौकिक संगीत यात्रा की दिव्य झांकी हैं। ऐसे महान शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!

बता दें कि उस्ताद बिस्मिल्ला खां का जन्म 21 मार्च 1916 को ओडिशा के शाहबाद जिले में हुआ था। शहनाई को दुनियाभर में एक खास पहचान उस्ताद बिस्मिल्ला खां ने ही दिलाई थी। उस्ताद बिस्मिल्लाह हिंदुस्तानी क्लासिकल संगीत के पुरोधा थे। शहनाई को पहले पारंपरिक कार्यक्रमों में ही बजाया जाता था, लेकिन उस्ताद बिस्मिल्ला खान ने इसे हर मंच पर लाने का काम किया।
हालांकि बिस्मिल्ला खान इस्लाम धर्म का पालन करते थे, लेकिन वो हिंदू और मुस्लिम दोनों ही के कार्यक्रम में शहनाई को बजाते थे। उस्ताद बिस्मिल्ला इतना लोकप्रिय हुए कि उन्हें दिल्ली के लाल किले में शहनाई वादन के लिए बुलाया गया। 15 अगस्त 1947 को जब लाल किले पर तिरंगा फहराया गया तो उस्ताद बिस्मिल्ला खान ने यहां शहनाई वादन किया था।
उस्ताद बिस्मिल्ला खान का बचपन का नाम कमरुद्दीन था, उनके बड़े भाई का नाम शमशुद्दीन था। जब कमरुद्दीन का जन्म हुआ तो उनके दादा ने उन्हें देखकर बिस्मिल्ला कहा था, जिसके बाद से उन्हे बिस्मिल्ला खान के नाम से जाने जाना लगा। महज 3 वर्ष की आयु में वह वाराणसी आ गए। यहां उन्होंने अपने मामा के यहां शहनाई वादन सीखा। 14 साल की उम्र में इलाहाबाद म्युजिक कॉन्फ्रेंस में बिस्मिल्ला खान अपने मामा के साथ गए। बिस्मिल्ला खान को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया। 90 वर्ष की आयु में बिस्मिल्ला खान की 21 अगस्त 2006 में मृत्यु हो गई।












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