इंदिरा गांधी को अयोग्य घोषित करना इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा ही साहसिक फैसला- CJI
प्रयागराज, 11 सितंबर: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के दौरे पर थे, वहां पर उन्होंने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उनके साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस एनवी रमना भी मौजूद थे। साथ ही अपने संबोधन के दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ हाईकोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसने देश का इतिहास बदलकर रख दिया था।

सीजेआई जस्टिस रमना ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहनलाल सिन्हा ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ जो फैसला दिया, साथ ही उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया, वो एक बड़ा साहसिक फैसला था। उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसके बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था, उसके परिणाम पर मैं विस्तृत बात नहीं करना चाहता हूं।
CJI ने आगे कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का 150 से अधिक वर्षों का इतिहास है। साथ ही इसकी बेंच ने देश के कुछ महान कानूनी दिग्गजों का निर्माण किया। संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा, पंडित मोतीलाल नेहरू, सर तेज बहादुर सप्रू और पुरुषोत्तम दास टंडन सभी इसी बार के सदस्य थे। प्रसिद्ध चौरी चौरा मामले में भी पंडित मदन मोहन मालवीय ने इसी हाईकोर्ट में अपील की थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि वहां के जज, कर्मचारी, वकील इस असाधारण विरासत, परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे।
क्या था इंदिरा गांधी का पूरा मामला?
1971 में देश में आम चुनाव हुए, जिसमें रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी ने राज नारायण को हराकर जीत हासिल की। इसके बाद उनकी जीत को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। साथ ही आरोप लगाया गया कि इंदिरा गांधी ने सरकारी मशीनरी का चुनाव में इस्तेमाल किया और उनके चुनावी एजेंट यशपाल कपूर सरकारी कर्मचारी थे। इसी मामले में फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें अयोग्य करार दिया था।












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