यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज, किन चेहरों पर BJP लगा सकती है दांव, जानिए
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं।
लखनऊ, 21 अगस्त: उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें एक बार फिर शुरू हो गई हैं। दिल्ली में बीजेपी में हुई बैठकों के बाद अब यूपी में कई ऐसे चेहरे हैं जो मंत्री बनने की दावेदारों की सूची में शामिल हो गए हैं। बीजेप के सूत्रों की माने तो मंत्रिमंडल का यह विस्तार अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितम्बर के पहले सप्ताह तक हो सकता है। जल्द ही एमएलसी के चार नामों की सूची जल्दी ही जारी की जाएगी जिसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख का ऐलान भी कर दिया जाएगा।

यूपी की सियासत में जो नाम तैर रहे हैं उनमें कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए जितिन प्रसाद, बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद, भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी विद्यासागर सोनकर, मोदी के खास और पूर्व आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा, भाजपा के पदाधिकारी जेपीएस राठौर का नाम शामिल है। बीजेपी की कोशिश है कि मंत्रिमंडल विस्तार में ज्यादा से ज्यादा जातियों को शामिल करने पर फोकस किया जाए ताकि इसका लाभ विधानसभा चुनाव के दौरान मिल सके।
मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर दिख रही अंदरुनी खींचतान
दरअसल जिन नामों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाने पर विचार हो रहा है उसमें सबसे बड़ा नाम जितिन प्रसाद का है। जितिन प्रसाद का मंत्री और एमएलसी बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि सूत्र यह बता रहे हैं कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जितिन प्रसाद के फेवर में नहीं है लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का दबाव है कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। योगी चाहते हैं कि जितिन की जगह लक्ष्मीकांत वाजपेयी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। उनका तर्क है कि वाजपेयी ने पार्टी को लंबा समय दिया है और वो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। उनका अनुभव अगले चुनाव में काम आ सकता है। लेकिन वाजेपयी के नाम को लेकर शीर्ष नेतृत्व अभी मंथन करने में जुटा है।
जितिन को मंत्री तथा वाजपेयी को एमएलसी बनाया जा सकता हैभाजपा के बीच अंदरखाने यह भी चर्चा है कि परिस्थितियां बनी तो इनमें से किसी एक को संगठन और किसी एक को सरकार में जगह दी जा सकती है। पार्टी दोनों नेताओं का समायोजन चाहती है। जितिन को मंत्री बनाकर सरकार में शामिल किया जा सकता है जबकि वाजपेयी को एमएलसी बनाकर संगठन का काम पकड़ाया जा सकता है। पार्टी का ऐसा मानना है कि अगला विधानसभा चुनाव देखते हुए वाजपेयी को सरकार से ज्यादा संगठन को जरुरत है।
मोदी के खास एके शर्मा एक बार फिर चर्चा में
योगी के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा में एक नाम ओर सामने आ रहा है और वो पूर्व आईएएस ओर पीएम मोदी के करीबी रहे एके शर्मा का है। शर्मा की राजनीति में एंट्री भी काफी धमाकेदार रही थी। भाजपा में शामिल होने के बाद रातों रात उन्हें एमएलसी का टिकट पकड़ा दिया गया और फिर मंत्री बनाने की अटकलों के बीच उन्हें संगठन में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई। तब ऐसा माना गया कि अब उनका चेप्टर क्लोज हो चुका है लेकिन दिल्ली में एक तरफ जब बीजेपी का आलाकमान और प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में बैठकें कर रहा था तब वो भी दिल्ली में ही डेरा डाले हुए थे। ऐसा बीजेपी के सूत्र बता रहे हैं।
शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर चल रही अटकलों पर भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी ने कहा, '' भाजपा में एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत चलता है। जो अटकलें लगाई जा रही हैं या जो खबरें छप रहीं हैं वो गलत साबित हो सकती हैं। मुझे नहीं लगता है कि एके शर्मा को मंत्री बनाया जाएगा क्योंकि पार्टी पहले ही उन्हें एमएलसी ओर उपाध्यक्ष बना चुकी है। वो भाजपा की बैठकों में भी अपने अहम सुझाव देते रहते हैं। लेकिन आलाकमान के मन में क्या चल रहा है इसके बारे में बता पाना कठिन है।''
एमएलसी विद्यासागर सोनकर हो सकते हैं पार्टी का दलित चेहरा
पार्टी के वरिष्ठ नेता वर्तमान में एमएलसी विद्यासागर सोनकर को पार्टी मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है। सोनकर पार्टी के जातिय समीकरण में भी फिट साबत हो सकते हैं और चुनाव के लिहाज से पार्टी उन्हें दलित चेहरे के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। वह मूलत जौनपुर से आते हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी हैं। हालांकि पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनाव में गाजीपुर से टिकट दिया था लेकिन तब वो चुनाव हार गए थे। बाद में उन्हें एमएलसी बनाया गया था।
यूपी में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं
उत्तर प्रदेश में अभी 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। अभी योगी कैबिनेट में फिलहाल 53 मंत्री शामिल हैं। इसमें 23 कैबिनेट मंत्री, 9 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 21 राज्य मंत्री शामिल हैं। इस लिहाज से अभी सात मंत्री और बनाए जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव में अब महज सात महीने ही बचे हैं। लिहाजा कैबिनेट के विस्तार में ओबीसी, अपर कास्ट, एससीएसटी सभी को समायोजित करने की कोशिश की जा रही है।












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