प्रत्याशियों की छवि को लेकर सतर्क हुई बसपा: पहले होगा इंटरव्यू, फिर मानदंडों पर खरा उतरने पर ही मिलेगा टिकट

लखनऊ, 3 अगस्त: उत्तर प्रदेश में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राजनीतिक पार्टियां नए नए तरीके इजाद करने में जुटी हुई हैं। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती भी इस बार अपनी पार्टी में चेहरों को लेकर सतर्क हो गई हैं। पार्टी की छवि को ध्यान में रखते हुए बसपा ने अब उम्मीदवारों के सामने कई शर्तें रखी हैं। उनके लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया गया है जिसमें उनसे कई सवाल पूछे जाएंगे। पार्टी के पदाधिकारियों की माने तो इसका मकसद साफ- सुथरी छवि और तेज तर्रार लोगों को पार्टी से जोड़ना है। इससे पार्टी के पास विकल्प मौजूद रहेंगे जिसकी वजह से उम्मीदवारों के चयन में आसानी रहेगी।

mayawati

पार्टी के पूव प्रदेश अध्यक्ष ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि दावेदारों के लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया गया है। इसको अपने बायोडाटा के साथ देना होगा। बसपा ने पुराने ढर्रे से इतर इस बार चुनाव लड़ने के दावेदारों से आवेदन मांगे हैं। बसपा ने आवेदन के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई है। वह कमेटी उम्मदवारों के आवेदन पर विचार करने के बाद चयनित आवेदन को प्रदेश कार्यकारिणी के पास भेजेगी। बताया जा रहा है कि कार्यकारिणी में शामिल नेता आवेदन करने वाले का साक्षात्कार करेंगे और उनकी पूरा इतिहास खंगाला जाएगा कि वो साफ सुथरे छवि के हैं या दागी हैं।

हर विधानसभा से दस आवेदन लिए जाएंगे
हर विभानसभा से दस आवेदन लिए जा रहे हैं। इन दस आवेदकों में से दो का नाम जिला और प्रदेश की कार्यकारिणी मिलकर तय करेगी। अंतिम रूप से चयनित दो आवेदक नेताओं के नाम बसपा प्रमुख मायावती के पास भेजे जाएंगे। बसपा ने यह भी साफ किया है कि यदि बसपा का कोई नेता बेहतर छवि का है लेकिन वह आर्थिक रूप से कमजोर है तो पार्टी उसे ही प्रत्याशी बनाएगी। चुनाव लड़ाने पर जो भी खर्च आएगा वो पार्टी ही वहन करेगी।

मायावती

बसपा के एक महासचिव ने वन इंडिया डॉट काम को बताया कि,

''बहुत से लोग इस बात पर सवाल उठाते रहे हैं कि बसपा में टिकट पैसे लेकर दिए जाते हैं। बसपा में टिकटों की बोली लगती है, ऐसा आरोप लोग लगाते रहते हैं इसीलिए बहनजी ने तय किया है कि इस बार एक पारदर्शी तरीका अपनाया जाए और टिकट पाने की चाह रखने वालों को उसमें शामिल होने का मौका दिया जाए। इससे प्रदेश कार्यकारिणी अपने स्तर पर परखेगी और फिर दो नामों को फाइनल कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में हर वह शख्स शामिल हो सकता है जो बसपा से टिकट लेना चाहता है। शर्त है कि उसे अपने सामाजिक और राजनीतिक कामों का पूरा ब्यौरा देना होगा।''

पार्टी के एक विधायक ने बसपा की तरफ से टिकट के दावेदारों के लिए की गई नई व्यवस्था को लेकर कहा कि यह सब तो चलता रहता है। टिकट के दावेदारों के लिए एक तरफ तो इंटरव्यू लेने की बात कही जा रही है वहीं दूसरी ओर यदि जिला लेवल पर बनी कमेटी ही नामों को भेजने में पक्षपात कर दे तो इसको कैसे दूर किया जाएगा। इंटरव्यू में बसपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अक्सर यह देखा जाता है कि क्षेत्र में मेहनत कोई और करता है और टिकट देने की बारी आती है तो बाहुबलियों और धन्नासेठों को मौका मिल जाता है। तब पार्टी कहती है कि जिसके पास पैसा है वही तो चुनाव लड़ेगा। इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की बात तो की जाती है लेकिन वह कितनी होगी यह तो टिकट के बंटवारे के समय पता चलेगा।

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