BJP बढ़ाएगी Mayawati की टेंशन? Mulayam के बाद Kanshiram को लेकर खेल सकती है बड़ा दांव
Kanshiram की जयंती के मौके पर बीजेपी के नेताओं ने जमकर उनकी प्रशंसा की। सीएम योगी और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने ट्वीट कर उनको एक महान नेता बताया। क्या आने वाले समय में बीजेपी कांशीराम को लेकर बड़ा दांव खेलेगी।

BJP leaders paid tribute to kanshiram: कहते हैं कि सियासत में कुछ स्थायी नहीं होता। अपने धुर विरोधी और कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) को पद्दम विभूषण देने वाली बीजेपी अब बसपा के दलित चिंतक कांशीराम की तारीफों के पुल बांध रही है। दरअसल बीजेपी 2024 से पहले यूपी में दलितों के बीच अपनी पैठ बनाने में जुटी है। बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि मायावती के कमजोर होने की वजह से बीजेपी को दलितों के बीच जाने का मौका मिला है और वह इसको गंवाना नहीं चाहती है। यही वजह है कि कांशीराम की जयंती के मौके पर पहली बार बीजेपी के नेताओं ने उनकी तारीफ की। सूत्रों का यह भी कहना है कि बीजेपी मुलायम की तरह ही कांशीराम को लेकर बड़ा दांव खेल सकती है।

मुलायम की तरह कांशीराम के लिए बड़ा दांव खेल सकती है
इस साल की शुरुआत में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। भाजपा ने बसपा के संस्थापक कांशीराम को उनकी 89वीं जयंती पर याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बुधवार को ट्वीट किया, "दलितों, वंचितों व शोशितों के समग्र उत्थान हेतु आजीवन संघर्ष करते रहे जनप्रिय राजनेता कांशी राम की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।" सूत्रों की माने तो कांशीराम को लेकर भी सरकार मुलायम की तरह ही बड़ा दांव खेल सकती है।
दलितों, वंचितों व शोषितों के समग्र उत्थान हेतु आजीवन संघर्षरत रहे जनप्रिय राजनेता कांशीराम की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 15, 2023
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की
यह संभवत: पहला अवसर था जब भाजपा के प्रमुख नेताओं ने दलित विचारक को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बसपा का गठन करने के बाद उसे उत्तर प्रदेश में एक राजनीतिक पॉवर बना दिया। कांशीराम का 2006 में निधन हो गया था। बसपा की राजनीतिक उत्तराधिकारी मायावती बार-बार उनके लिए भारत रत्न की मांग करते रहे हैं। अब बीजेपी सूत्रों का कहना है कि भारत रत्न की बजाए मुलायम की तरह कुछ अलग तरह से सम्मान पार्टी उनको दे सकती है।
कुशल राजनीतिज्ञ, दलितों, वंचितों एवं शोषितों के प्रभावशाली स्वर मान्यवर कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन। pic.twitter.com/vXox1X0Pma
— Bhupendra Singh Chaudhary (@Bhupendraupbjp) March 15, 2023
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी को घेरा
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा कि, 'भाजपा की विचारधारा कांशी रामजी के विपरीत है। सिर्फ नमन करने से कुछ नहीं होगा, उनकी विचारधारा को भी अपनाना होगा।' वहीं, भाजपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी उन नेताओं का "सम्मान" करती है जिन्होंने सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यूपी बीजेपी के प्रवक्ता आनंद दुबे कहते हैं कि, 'गरीबों और दलितों के उत्थान के लिए बहुत काम करने वाले कांशी रामजी को याद करने में कुछ भी गलत नहीं है।'

कांशीराम की तारीफ कर दलितों को लुभाने की कोशिश
आरएसएस ने भी हाल ही में हरियाणा में हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में मुलायम को श्रद्धांजलि दी थी। कांशीराम और बीजेपी के मिलन का इतिहास पुराना रहा है। बीजेपी ने तीन बार बसपा को यूपी में सरकार बनाने में मदद की थी। विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी का कांशीराम का आह्वान दलितों के बीच अपनी पहुंच को गहरा करने के लिए एक और कदम है। 2014 में नरेंद्र मोदी की जीत के बाद से ही बीजेपी ने दलितों की तरफ फोकस किया है।

RSS के नेता भाऊराव देवरस भी करते थे विपक्षी नेताओं की वकालत
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज कहते हैं कि,
भाजपा आरएसएस नेता भाऊराव देवरस के दृष्टिकोण को अपना रही है, जो हमेशा राजनीतिक प्रतिबद्धता के बावजूद नेताओं को याद रखने की वकालत करते थे। 2014 में सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने लगातार दलित आइकन, बीआर अंबेडकर को याद किया है और उनकी तारीफ की है। इसको नई बीजेपी की नई रणनीति कह सकते हैं। दलितों को एकजुट करने के लिए इसको एक राजनीतिक संकेत के तौर पर देख सकते हैं। यह यहीं तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में अभी और इस तरह के कदम आपको देखने को मिल सकते हैं।
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