UP में SP-RLD गठबंधन को काउंटर करने के लिए जाट चेहरे पर दांव खेल सकती है BJP

लखनऊ, 25 अगस्त : उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेजी से लगाई जा रही हैं। कुछ दिन पहले तक यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे थे लेकिन पिछले 24 घंटे से अब नये नाम का तूफान खड़ा हुआ है। ये नाम यूपी के पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी का है। भूपेंद्र सिंह पश्चिमी यूपी की जाट बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। ऐसी अटकलें चल रही हैं कि उन्हें नए बॉस बनाया जा सकता है और गुरुवार को इसका ऐलान हो सकता है। सूत्रों की माने तो इस नाम को लेकर बीजेपी आलाकमान और संघ ने भी अपनी सहमति दे दी है। जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।

पूरब-पश्चिम का समीकरण साध सकती है बीजेपी

पूरब-पश्चिम का समीकरण साध सकती है बीजेपी

सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मंत्री भूपेंद्र चौधरी को भाजपा की राज्य इकाई का प्रमुख नियुक्त किए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेता चौधरी ने बुधवार देर शाम भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की। चौधरी स्वतंत्र देव सिंह की जगह ले सकते हैं, जिन्हें योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनाया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले मुख्यमंत्री के साथ, भाजपा पार्टी के राज्य प्रमुख के रूप में चौधरी की नियुक्ति के साथ एक क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

पश्चिम में जाट बिरादरी को साधने की कवायद

पश्चिम में जाट बिरादरी को साधने की कवायद

बीजेपी के सूत्रों की माने तो भूपेंद्र चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना इसलिए बन रही है क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान जाटों की नाराजगी बीजेपी पर भारी पड़ी थी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ये खतरा मोल नहीं ले सकती है इसलिए जाट समुदाय को खुश करने के लिए बीजेपी भूपेंद्र के नाम का ऐलान कर सकती है। भूपेंद्र सिंह को लेकर बीजेपी में दो धडे़ हैं। एक धड़ा इनकी वकालत कर रहा है तो दूसरे धड़े की दलील है कि पूर्वांचल में पार्टी की स्थिति पश्चिम से ज्यादा खराब है। भूपेंद्र के अध्यक्ष बनने से पूर्वांचल में बीजेपी को कितना फायदा होगा यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि कई जिले तो ऐसे हैं जहां बीजेपी का खाता तक नहीं खुला है।

सपा-रालोद के गठबंधन को काउंटर करने की रणनीति

सपा-रालोद के गठबंधन को काउंटर करने की रणनीति

बीजेपी के सूत्रों की माने तो पश्चिम में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन को बिखरने के लिए जाट समुदाय के प्रदेश अध्यक्ष का आना बेहद जरूरी है। पार्टी का मानना है कि आम चुनाव में अखिलेश-जयंत का गठबंधन बीजेपी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है इसलिए पश्चिम के समीकरण को साधने के लिए बीजेपी यह दांव खेल सकती है। इससे जाट समाज में एक अच्छा संदेश जाएगा और उनकी नाराजगी दूर हो सकेगी। विधानसभा चुनाव में भी जाट समुदाय को लुभाने की भरपूर कोशिश सपा-आरएलडी गठबंधन ने की थी और कुछ हद तक इसका फायदा भी मिला था।

राजभर साथ आए तो पूर्वांचल में मजबूत होगी बीजेपी

राजभर साथ आए तो पूर्वांचल में मजबूत होगी बीजेपी

पार्टी के नेताओं की दलील है कि विधानसभा चुनाव के दौरान ओम प्रकाश राजभर के अखिलेश के साथ जाने से वहां पार्टी को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। अब पूर्वांचल में यह गठबंधन बिखर गया है और आने वाले समय में राजभर यदि बीजेपी के साथ आते हैं तो पूर्वांचल में बीजेपी के लिए जीत की राह और आसान हो जाएगी। हालांकि राजभर ने अभी बीजेपी के साथ कोई समझौता नहीं दिया है लेकिन पिछले दिनों जिस तरह से अखिलेश के प्रति उनका रुख दिखा उससे बीजेपी के भीतर उत्साह का संचार हुआ। बीजेपी मौके को भुनाने के लिए ही राजभर को वाई श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई थी।

मुलायम सिंह से चुनाव हारे थे भूपेंद्र सिंह

मुलायम सिंह से चुनाव हारे थे भूपेंद्र सिंह

पार्टी सूत्रों के मुताबिक उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। सिर्फ नाम की घोषणा होनी बाकी है। भूपेंद्र सिंह चौधरी उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी हैं। भूपेंद्र सिंह 10 जून 2016 को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए। 1999 के लोकसभा चुनाव में भूपेंद्र सिंह ने भारतीय जनता पार्टी को टिकट देकर संभल से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में चौधरी भूपेंद्र सिंह समाजवादी पार्टी के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से हार गए थे।

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