यूं ही नहीं है भाजपा को यूपी में जीत का भरोसा, जानिए पर्दे के पीछे का खेल
पर्दे के पीछे से भाजपा के लिए जीत का मंत्र तैयार कर रहे हैं सुनील बंसल, पार्टी की तमाम रणनीति को बनाने में निभाते हैं अहम भूमिका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत का दावा कर रही है, पार्टी को भरोसा है कि वह 300 से अधिक सीटें प्रदेश के चुनाव में जीतेगी और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी। पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत तमाम बड़े नेता लगाार रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। लेकिन इन बड़े नेताओं से इतर कुछ ऐसे भी कार्यकर्ता हैं जो पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के लिए रणनीति बनाने का काम करते हैं, उनमे से ही एक हैं सुनील बंसल, जोकि पार्टी के संगठन सचिव हैं।

2014 में भी निभाई थी अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने का जिम्मा अमित शाह ने सुनील बंसल को दिया है। प्रदेश में आखिरी चरण के मतदान के लिए सुनील बंसल ने वाराणसी में अपना डेरा डाल दिया है। सुनील बंसल उत्तर प्रदेश आने से पहले भाजपा की स्टूडेंट विंग एबीवीसी से जुड़े थे और उन्होंने 2014 में भी भाजपा के लोकसभा चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभाई थी, उस वक्त पार्टी को 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

शाह के नक्शे कदम पर बंसल
सुनील बंसल अमित शाह की ही तर्ज पर हर रोज रात में एक डायरी में तमाम योजनाओं को दर्ज करते हैं और पार्टी की रणनीति बनाते हैं। बंसल का कहना है कि उन्होंने तीन कमजोर क्षेत्र में काम करना शुरु किया, पहला गांव तक पार्टी की पहुंच को बढ़ाना, पार्टी ने 2015 में पंचायत चुनावों में हिस्सा लिया और 3000 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे 350 सीटों पर ही जीत हासिल हुई, लेकिन इस दौरान हमने तमाम ग्रामीण स्तर पर गांव के स्तर के टैलेंट पूल बनाए जो हमें इस चुनाव में जीत में काफी मदद करेगा।

बूथ लेवल पर मजबूती
पार्टी की दूसरी सबसे बड़ी कमजोरी थी कि 2014 तक पार्टी सिर्फ एक चौथाई हिस्सों तक सीमित थी और प्रदेश में कुल 1.4 लाख बूथ पर पार्टी की पकड़ मजबूत नहीं थी। लेकिन 2016 तक हमने बड़ा सदस्यता अभियान शुरु किया जिसके चलते पार्टी की पहुंच 1.28 लाख बूथ तक पहुंची। बंसल बताते हैं कि आज हर बूथ पर हमारे तकरीबन 10 कार्यकर्ता हैं। लखनऊ में 150 सदस्यों का एक कॉल सेंटर बनाया गया है जो इन बूथ सदस्यों की प्रमाणिकता करते रहते हैं, ऐसे में जो लोग सही नहीं मिलते हैं हम उनकी जगह दूसरों को नियुक्त करते हैं।

भाजपा को अगड़ी जाति की पार्टी माना जाता था
वहीं प्रदेश में पार्टी की तीसरी बड़ी कमजोरी थी प्रदेश में हमें अगड़ी जाति की पार्टी के तौर पर जाना जाता था, लेकिन अभ हमने 40 फीसदी उन लोगों को अपने साथ जोड़ा है, जिसमें पिछड़ी जाति के लोग, एसएसी, एसटी के लोग भी हैं, इससे पहले यह आंकड़ा सिर्फ 10 फीसदी थी।

यूं ही नहीं दिया दूसरे दलों के उम्मीदवारों को टिकट
इन अहम कमजोरियों के साथ ही पार्टी के पास एक और बड़ी चुनौती यह थी कि पार्टी पर आरोप है कि पार्टी ने 80 से अधिक उन उम्मीदवारों को टिकट दिया है जो दूसरे दल से आए हैं। बंसल का कहना है कि प्रदेश में 67 सीटें ऐसी हैं जिसपर भाजपा को कभी भी जीत हासिल नहीं हुई है, यह मुख्य रूप से वह जिले हैं जहां मुस्लिमों, यादवों, दलितों का बाहुल्य है, जोकि मुख्य रूप से सपा और बसपा का वोटर है। ऐसे में अधिकतर उम्मीदवार जो दूसरे दलों से आएं हैं वह इन्ही विधानसभा सीटों से हैं जोकि कभी भी भाजपा की सीट नहीं रही है।












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