अखिलेश के लिए 'साइलेंट किलर' साबित हो रही BJP, शिवपाल-राजभर के पास नहीं बचा कोई विकल्प ?
लखनऊ, 11 जुलाई : उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी प्रगतिशील पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव और एसबीएसपी के चीफ ओम प्रकाश राजभर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ होते हुए भी नहीं हैं। दरअसल कुछ दिनों से दोनों नेता अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर हैं। दोनों नेता द्रोपदी मुर्मू के सम्मान में दिए गए भोज में भी शामिल होने पहुंचे थे। तब राजभर ने बयान दिया था कि वह द्रोपदी मुर्मू का समर्थन करेंगे लेकिन अब वो अपनी बात से पलट गए हैं। राजनीतिक पंडितों की माने तो बीजेपी शिवपाल और राजभर जैसे नेताओं को अखिलेश के खिलाफ इस्तेमाल करके उनपर नैतिक दबाव बनाने का खेल खेल रही है। बीजेपी को पता है कि अभी इन दोनों नेताओं को साथ लाने का बीजेपी को फायदा नहीं है। इसलिए बीजेपी इन दोनों नेताओं को घास नहीं डाल रही है। दूसरी ओर देखें तो राजभर और शिवपाल के पास भी विकल्प नहीं बचे हैं।

ओम प्रकाश राजभर ने फिर क्यों लिया U टर्न
उत्तर प्रदेश की सियासत में हर रोज नए यू टर्न देखने को मिलते रहते हैं। दो तीन दिन पहले ही ओम प्रकाश राजभर ने एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के सम्मान में दिए भोज में मुख्यमंत्री आवास जाकर सबको चौंका दिया था। लेकिन राजभर ने अखिलेश को अल्टीमेटम दिया था कि यदि वो उनसे सम्पर्क नहीं करते हैं तो गठबंधन पर कोई भी फैसला लेने के लिए वह स्वतंत्र होंगे। अब इस खेल में नया टि्वस्ट आ गया है। राजभर ने यूपीए के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को समर्थन देने का ऐलान किया है।

शिवपाल-राजभर का बीजेपी को कोई फायदा नहीं
दरअसल बीजेपी अभी शिवपाल और ओम प्रकाश राजभर को साथ नहीं लेना चाहती है। बीजेपी के रणनीतिकारों की माने तो 2024 का चुनाव अभी दूर है लिहाजा बीजेपी ओम प्रकाश राजभर को साथ लाकर अपनी फजीहत नहीं कराना चाहती है। राजभर हमेशा ही मुखर होकर बीजेपी का विरोध करते रहे हैं। साथ रहकर भी राजभर हमेशा बीजेपी पर दबाव बनाते रहेंगे उससे अच्छा कि पार्टी अभी उनसे दूर ही रहे। दूसरी तरफ शिवपाल इस मैदान में अकेले पड़ते जा रहे हैं। पहले आजम के बहाने उन्होंने अखिलेश पर दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन अखिलेश ने आजम की सारी बातें मानकर उनकी बगावत को थाम लिया था। अब शिवपाल के पास भी अकेले रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

दोनों नेताओं के बहाने अखिलेश को परेशान करती रहेगी बीजेपी
बीजेपी की रणनीति शिवपाल-राजभर के बहाने अखिलेश को समय समय पर परेशान करने की ही है। इन दोनों नेताओं को साधकर वह अखिलेश को उलझाए रखना चाहती है। एक तरफ बीजेपी जहां 2024 की तैयारियों में जुटी है वहीं दूसरी ओर सपा अपने गठबंधन और शिवपाल के साथ ही उलझी नजर आ रही है। आजमगढ़-रामपुर में मिली हार ने सपा को और चिंता में डाल दिया है। बीजेपी चाहती है कि शिवपाल-राजभर को अंदरखाने इस लिहाज से साधा जाए कि समय समय पर वह अखिलेश के लिए परेशानी का सबब बनते रहें।

राजभर-शिवपाल के पास भी नहीं बचे हैं विकल्प
राजनीतिक पंडितों की माने तो शिवपाल यादव और ओम प्रकाश राजभर के पास भी कोई विकल्प नहीं बचा है। बीजेपी इन दोनों को अपने साथ नहीं लेना चाहती। शिवपाल अखिलेश के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंककर अपने पार्टी का बंगला ही बचाए रखना चाहते हैं। शिवपाल को बीजेपी भाव नहीं देना चाहती है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शिवपाल को पहले लगा कि बीजेपी का गुणगान कर वह विधानसभा उपाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं लेकिन उनकी दाल नहीं गली। इसके बाद बीजेपी ने पीसीएफ के चुनाव में भी शिवपाल को तगड़ा झटका दिया और उनके बेटे को पैदल कर दिया। शिवपाल की रही सही उम्मीदें भी समाप्त हो गईं थीं।

बीजेपी का खेल समझ रहे हैं अखिलेश यादव ?
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव शायद बीजेपी के इस खेल को बखुबी समझ रहे हैं। क्योंकि जब ओम प्रकाश राजभर के सवालों को लेकर उनसे जवाब मांगा गया था जब उन्होंने कहा था कि कभी कभी राजनीति में कुछ खेल पर्दे के पीछे से भी होते हैं। शायद अखिलेश को भी इस बात का अंदाजा है कि बीजेपी की मंशा क्या है और वह राजभर और शिवपाल को कैसे अपना मोहरा बनाकर उनके खिलाफ इस्तेमाल कर रही है। इसलिए अखिलेश भी इन दोनों नेताओं को लेकर कोई भी कदम काफी फूंक फूंककर रख रहे हैं।












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