जनता ने वाराणसी को किया मोदी के हवाले, फूलों का नहीं, कांटों का ताज

वाराणसी में आठों सीटों पर जीत दिलवाकर जनता ने वाराणसी को मोदी के हवाले कर दिया है। वाराणसी के विकास की बड़ी जिम्मेदारी अब भाजपा के कंधों पर है।

वाराणसी। विधानसभा चुनावों का परिणाम आ गया और पूरे उत्तर प्रदेश में भगवा रंग के गुलाल भी उड़ाए गए। पर जो आज तक नहीं हुआ वो पहली बार काशी में हुआ। काशी के जनता ने नमो का साथ दिया और वाराणसी के आठों विधानसभा पर भाजपा और उनके सहयोगी दलों की जीत दर्ज कराई। ऐसे में काशी की जनता की जनता के अपेक्षाओं के जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और बीजेपी के शीर्ष पर बढ़ चुकी है और हो भी क्यों नहीं? काशी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र भी तो है और मोदी ने खुद तीन दोनों पर जनता से मिलने के लिए सड़कों पर उतर अभिवादन भी किया। काशी के वासियों में प्रधानमंत्री का सम्मान किया और उनसे किया हुआ वादा निभाते हुए आठ की आठों सीटें मोदी को दे दी। जिसके बाद काशी के खस्ताहाल को सुधारने की ख्वाहिश है, तभी तो वाराणसी के मतदाताओं ने समाजवादी पार्टी के मंत्री और विधायक से लेकर बसपा तक के कद्दावर नेता और कांगेस के गढ़ को भी भाजपा के हवाले कर दिया है।

काशीवासियों ने मोदी के हवाले किया बनारस

काशीवासियों ने मोदी के हवाले किया बनारस

बनारस के अल्हड़ मिजाज पूरे हैं और यही अल्हड़ मिजाजी काशीवासियों ने अपना बनारस मोदी के हवाले कर दिया है। बीते लोकसभा चुनाव में भी इन बनारसियों ने मोदी को काशी का सांसद बनाया था और अब सभी विधायक भी भाजपा के होंगे। मसलन उत्तर प्रदेश से लेकर केंद्र तक की बागडोर नरेंद्र मोदी और उनके सिपहसालारों के हाथ में है पर काशी का ताज फूलों का नहीं बल्कि कांटों का माना जाता हैं। जिसके लिए यहांं के वोटर काफी फेमस भी हैं। एक बार किसी से नाराज हो जाते हैं तो फिर किसी की नहीं सुनते ऐसे में बनारस के मुलभूत समस्याओं का समाधान करना भाजपा के सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी और यदि पार्टी इसमें कामयाब हो जाती हैं तो एक बार फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में काशी में बैठ कर पूर्वांचल पर अपना कब्जा जमा सकती हैं।

इन दिग्गजों का काशीवासियों ने हटा दिया

इन दिग्गजों का काशीवासियों ने हटा दिया

काशी की जनता ने बीजेपी के अग्नि परीक्षा की शुरुआत करते हुए बनारस के आठों सीट पर पार्टी का भगवा फहराने में मदद करते हुए कई ऐसी सीटें भारतीय जनता पार्टी के झोली में डाली जिसकी पार्टी को भी उम्मीद नहीं होगी। दरसअल वाराणसी विधानसभा के आठों सीटों पर कई ऐसे भी महारथी थे जिन्हें ये उम्मीद नहीं थी कि उनके हाथ हार भी लग सकती है।

सेवापुरी विधानसभा

सेवापुरी विधानसभा

इस विधानसभा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के PWD राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल का कब्जा बरकरार था। बीते दो दशक से सुरेंद्र पटेल यहां से जीतते आ रहे थे। यही वजह थी कि इस बार के सरकार में इन्हें मंत्री भी बनाया गया था पर अपना दल के प्रत्याशी नील रतन सिंह पटेल 'नीलू' ने इनके जीत का पहिया रोक दिया। इस विधानसभा चुनाव में नील रतन को 103423 मत मिले तो सुरेंद्र पटेल को 54241 मत यानि अपना दल ने इन्हें 49182 वोटो के भरी अंतर से हराया।

शिवपुर विधानसभा

शिवपुर विधानसभा

इस विधानसभा की बात की जाए तो तो इस सीट पर भाजपा ने सबसे ज्यादा अंतर से जीत हासिल की है। यहां भाजपा के उम्मीदवार अनिल राजभर को 110453 वोट मिले जबकि समाजवादी पार्टी के आनन्द मोहन यादव 'गुड्डू' को 56194 मत मिले। बीजेपी के प्रत्याशी अनिल ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को 54259 वोटों से हराया।

रोहनिया विधानसभा

रोहनिया विधानसभा

भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र नारायण सिंह ने अपनी पार्टी के लिए यहां से जीत दर्ज करायी। ये सीट बीते उपचुनाव में सपा के हाथों में चली गयी थी और सुरेंद्र नारायण ने ये सीट जीत कर दोबारा से पार्टी को दिया है। सुरेंद्र नारायण को यहांं से 119885 वोट मिले हैं जबकि सपा के महेंद्र पटेल को 62332 वोट मिले।

पिण्डरा विधानसभा

पिण्डरा विधानसभा

भाजपा के लिए ये सीट अब तक के विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी उपलब्धि है क्योंकि ये सीट कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट थी। यहां बाहुबली विधायक अजय राय बीते 28 सालों से लगातार जीतते आ रहे थे। भाजपा के प्रत्याशी अवधेश सिंह ने पार्टी का कमल खिलाते हुए अजय राय को परास्त किया हैं अवधेश सिंह को 90614 और अजय राय को 48199 मत मिले।

अजगरा विधानसभा

अजगरा विधानसभा

अजगरा विधानसभा से हमेशा से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी जीतते आ रहे थे। बीते विधानसभा चुनाव में भी जब सपा की लहर थी तो भी प्रत्याशी त्रिभुवन राम ने ये सीट जीत पर मायावती को बतौर तोहफा दिया था। इस बार इनका ये सिक्का भी नहीं चला। भासपा के उम्मीदवार कैलाश सोनकर ने बसपा प्रत्याशी को हराते हुए भाजपा गठबन्धन को जीत दिलायी है। कैलाश सोनकर को 83778 जबकि त्रिभुवन राम को 52480 वोट मिले हैं।

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