आलू किसानों की समस्या व गांवों के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, कैबिनेट ने कई प्रस्ताव को दी मंजूरी
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लखनऊ। यूपी विधानसभा व राजभवन के सामने जिस तरह से हाल ही में तमाम आलू किसानों उचित मूल्य नहीं मिलने की वजह से रातो-रात सड़क पर बड़ी मात्रा में आलू फेंका उसके बाद आखिरकार योगी सरकार ने इस बाबत एक कमेटी बनाने का फैसला लिया है, जोकि आलू किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए अपने सुझाव देगी। यह कमेटी सरकार को यह सुझाव देगी कि प्रदेश के आलू किसानों को जो दिक्कतें हो रही है उससे निपटने के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है।

15 दिन के भीतर रिपोर्ट देगी कमेटी
मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कमेटी के गठन की इजाजत दे दी है, जिसकी अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या करेंगे। कमेटी अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सरकार को देगी। यूपी सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने इस बाबत जानकारी देते हुए कहा कि यह कमेटी अपनी रिपोर्ट को 15 दिन के भीतर सरकार को देगी, जिसके बाद कमेटी द्वारा दिए गए सुझाव को लागू किया जाएगा। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते लखनऊ में आलू की उचित कीमत नहीं मिलने के विरोध में किसानो ने आलू सड़क पर फेंक दिया था।

गांवों के लिए खास प्रस्ताव को मिली मंजूरी
इसके अलावा कैबिनेट में मुख्य मंत्री समग्र ग्राम विकास योजना के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है, यह योजना मुख्य रूप से उन गांव के लोगों के लिए है जोकि अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे हुए हैं, राज्य की सीमा से जुड़े हुए हैं या फिर जहां वंतंगिया, मुसहर और थारू आदिवासी अधिक हैं। इस योजना के तहत गांवों के नाम को शहीद ग्राम नाम देने का भी प्रस्ताव दिया गया है। अगर ये गांव पक्की सड़क से नहीं जुड़े हैं तो इन्हें कंक्रीट की सड़क से जोड़ा जाएगा और उन्हे गौरव पथ का नाम दिया जाएगा। इन गांवों की पहचान एक कमेटी सर्वे के बाद करेगी, जिसकी अध्यक्षता हर जिले के चीफ डेवलेपमेंट अधिकारी करेंगे और सरकार को इसली लिस्ट मुहैया कराएंगे।

फिक्स वैट और शिक्षकों को 5 साल की छुट्टी को मंजूरी
सरकार ने नेचुरल गैस पर वैट को 5 फीसदी फिक्स करने के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है। साथ ही सरकार ने गोरखपुर में बंद हो गई पिपराइच सुगर मिल को फिर से गैर विवादित जमीन पर शुरू करने की इजाजत दे दी है, वहीं बस्ती में भी मुंडेरवा सुगर मिल को भी खोलने की इजाजत दे दी गई है। इन तमाम प्रस्ताव के अलावा सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है, जिसमे शिक्षकों को पांच साल तक की स्पेशल छुट्टी को हरी झंडी दे दी गई है। जो शिक्षक कॉलेज या विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं और वह विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य हैं या फिर उन्हें राज्य सरकार के किसी विभाग में तैनात किया गया है तो उन्हे 5 साल की स्पेशल छुट्टी मिलेगी। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।












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