मिर्जापुर: विभूति एक्सप्रेस ने कार को मारी टक्कर, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत
बेटी का तिलक चढ़ाने जा रहे एक ही परिवार के 5 लोगों की कार रेलवे क्रांसिग पर विभूति एक्सप्रेस से टकरा गई जिससे मौके पर ही पांचों लोगों की मौत हो गई।
मिर्जापुर। यूपी के भदोही जिले के औराई थाना क्षेत्र के गोरीपुर में एक मानव रहित रेलवे क्रांसिंग पर कार और ट्रेन में हुई टक्कर में कार में सवार एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। मिली जानकारी के मुताबिक मरने वाले पांचों लोग
मिर्जापुर जिले के कछवां थाना क्षेत्र के आही बंधवा गांव के निवासी थे। इसमें चार आपस में चचेरे भाई थे।

बेटी का तिलक लेकर जा रहे थे
आही बंधवा गांव के निवासी बालकृष्ण की बेटी रानी का शादी पखवइयां गांव में तय था। शनिवार को रानी का तिलक था जिसे चढ़ाने लड़की के चाचा समेत पांच लोग स्वीफ्ट डिजायर कार से जा रहे थे। रास्ते में गोरीपुर में मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर स्वीफ्ट डिजायर कार के विभूति एक्सप्रेस ट्रेन में टकराने कार में सवार पांचो लोगों की मोत हो गई। मृतकों में कार चालक प्रदीप त्रिपाठी (48), लड़की के चाचा सतीश त्रिपाठी (58), अजीत त्रिपाठी (42), विपुल त्रिपाठी (30), और गांव के पुरोहित रामसजीवन मिश्रा ( 65) शामिल हैं। घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया।

गांव में पसरा मातम, पूरा गांव घटना स्थल पर पहुंचा
एक ही परिवार के चार लोगों कुल पांच लोगों की मौत की घटना से आही बंधवा गांव में मातम पसर गया। जिसको घटना की जैसे सूचना मिली सभी घटना स्थल की रवाना हो गए। सूचना के एक घंटे बाद पूरा गांव पुरुषों से खाली हो गया। अधिकांश लोग घटना स्थल पर पहुंच गए। जो लोग किसी कारण से नहीं पहुंच पाए उनमें इक्का-दुक्का लोग रहे। लोग किसी से कुछ बताने की स्थिति में नहीं थे। कुछ पूछने पर ही उनके आंख से आंसू छलक पड़े रहे थे। वह सिर्फ इतना ही कह पा रहे थे कि इतनी बड़ी घटना के बाद अब बचा क्या है कि बताया जाए। किसी तरह लोग मृतकों का ओर उनके परिवार के सदस्यों का नाम बता पाए। महिलाओं के आंखों के आंसू रो रोकर सूख गए थे। हर कोई दुखी था और घरों पर बैठकर खुद को ही ढांढस बंधा रहा था।

रानी ही नहीं पूरा परिवार गश खाकर गिरने लगा
जिस बेटी का तिलक लेकर परिवार के सदस्य पखवईया गांव जा रहे थे उसको घटना की सूचना मिलते ही बेहोश होकर गिर पड़ी। होश में आने के बाद वह रह-रह कर सिर पीटकर चिल्लाने लग रही थी। इसलिए फिर बेहोश हो जा रही थी। किसी के समझाने का भी उस पर कोई असर नहीं था। बेटी के साथ ही पूरा परिवार की महिलाएं अर्धविक्षिप्ता की अवस्था में पहुंच गयी थीं। परिवार में पुरुषों के न होने के कारण गांव की महिलाएं ही उनको समझाती रहीं। लेकिन किसी के समझाने का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था।

पूरे गांव में नहीं जला चूल्हा
आही बंधवा गांव में शनिवार की रात चूल्हा नहीं जला। गांव के अधिकांश पुरुष घटना स्थल पर पहुंच गए थे। पीड़ित परिवार की कुछ महिलाएं भी घटना की सूचना पर वाहनों में सवार होकर चली गईं। दूसरे घरों की जो महिलाएं और बच्चे थे वह भी विलखते नजर आए। किसी के घर में चूल्हा नहीं जल पाया। रात के अंधेरे में भी गांव से सिर्फ महिलाओं के रूदन की आवाज ही बाहर निकल पा रही थी।












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