बरेली: दलितों और मुस्लिमों से वोट नहीं मांगते ये बीजेपी विधायक

दलित भी विधायक द्वारा वोट नहीं मांगे जाने से निराश हैं। उनका कहना है जब देश के प्रधानमंत्री सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं तो उनका विधायक उनसे वोट क्यों नहीं मांग सकता?

बरेली। शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर लड़ रहे डॉक्टर अरुण कुमार उन घरों से वोट नहीं मांगते जहां दलित वोटर रहते हैं। बरेली विधानसभा सीट पर अच्छी संख्या में दलित और मुस्लिम वोट है जो काफी हद तक हर प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करता है। लोकतंत्र के पर्व में लोगों को अपने प्रतिनिधियों से मिलने का मौका होता है जहां वह अपने मुद्दे रखने के साथ अपने नेता की बातचीत के आधार पर उसके प्रति अपना मत बनाते हैं। लेकिन ऐसे में एक वर्तमान विधायक इसलिए दलितों के घर नहीं जाते कि वह किसी पार्टी से तालुक रखते हैं।

बरेली: दलितों और मुस्लिमों से वोट नहीं मांगते ये बीजेपी विधायक

कुछ इस तरह की स्तिथि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की है जहां भाजपा से जुड़े उम्मीदवार दलित क्षेत्रों में जाना ही नहीं चाहते। शहर विधायक अरुण कुमार इन दिनों शहर के तमाम क्षेत्रों में अपना जनसंपर्क साधे हुए हैं। जहां उन्हें शहर के अलग स्थानों पर जाना पड़ रहा है। शहर विधायक ने इसी क्रम में कर्मचारी नगर क्षेत्र में जनसंपर्क कर लोगों से अपना वोट मांगा लेकिन उन घरों को छोड़ दिया जो घर दलित लोगों के हैं।

दलित भी विधायक द्वारा वोट नहीं मांगे जाने से निराश हैं। उनका कहना है जब देश के प्रधानमंत्री सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं तो उनका विधायक उनसे वोट क्यों नहीं मांग सकता। कर्मचारी नगर में दलित परिवार ने बताया कि वह कभी बीएसपी को वोट नहीं देते लेकिन किसी पार्टी का शख्स इसलिए छोड़ रहा है कि वह बीएसपी के वोटर हैं तो इसे लोकतंत्र के लिहाज से अच्छा नहीं कहा जा सकता।

बरेली: दलितों और मुस्लिमों से वोट नहीं मांगते ये बीजेपी विधायक

वहीं दलित समाज की एक महिला का कहना है कि विधायक जी उनके घर के आस-पास वोट मांगते रहे लेकिन उनके घर वोट देने की अपील ही नहीं की। जबकि वह भाजपा और मोदी की समर्थक है। वहीं किला क्षेत्र में रहने वाले आविद भी कहते हैं कि उन्होंने यह कभी नहीं देखा कि कोई भाजपा का नेता उनके घर वोट मांगने के लिए आया हो। भाजपा के जिला अध्यक्ष रविंद्र राठौर को इस पूरे मामले की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में विधायक जी से बात करेंगे, अगर ऐसा हुआ तो गलत हुआ। विधायक जी को सबके घर पार्टी के लिए वोट मांगने के लिए जाना चाहिए। अब सवाल उठता है कि जब जनता के प्रतिनिधि जनता को धर्म और जाति के तराजू में तौलकर देखेंगे तो क्या जनता से जुड़े मसले और लोगों की एक दूसरे के प्रति सोच सकारात्मक हो सकेगी?

एक नजर यहां मुस्लिम-दलित वोटर्स हैं कितने खास?

बरेली शहर विधानसभा में 3 लाख 50 हजार मतदाता हैं जिसमें 1 लाख 50 हजार महिला मतदाता हैं।

ब्राह्मण - 12 से 13 हजार

ठाकुर - 5 हजार

वैश्य - 12 से 13 हजार

कायस्थ - 28 से 30 हजार

कुर्मी - 15 हजार

धोबी - 5 हजार

पंजाबी - 12 हजार

लोधी - 10 से 12 हजार

कश्यप - 10 से 12 हजार

मौर्या - 15 हजार

बाल्मीकि - 12 से 13 हजार

जाटव - 10 हजार

मुस्लिम - 1 लाख 20 हजार

ईसाई - 5 हजार

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