सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक पर दिए फैसले पर क्या बोले आजम खान?

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रामपुर। तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस अवैध करार दिया और केंद्र सरकार से छह महीने के अंदर इस पर कानून बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने कहा कि न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करना चाहिए लेकिन किसी पार्टी का बहुमत होने से धर्म को नहीं बदला जा सकता, अगर वो ऐसा करते हैं तो गलत होगा।

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'जनता की भी अदालत है'

आजम खान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के बाद भी जनता की अदालत है। वाकई भारत में लोकतंत्र का कुछ भी हिस्सा बाकी है तो धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ नहीं होगा, वरना यह बहुत मुश्किल होगा कि कब किसकी आस्था पर कुठाराघात हो जाए। पार्लियामेंट जो भी कानून बनाएगी उसमें इस्लामिक स्कॉलर्स की राय ली जाएगी। इस्लामिक स्कॉलर्स राजनीति से प्रेरित नहीं होते।

उलेमाओं की राय से बने कानून

उलेमाओं की राय से बने कानून

उन्होंने कहा कि उनको उम्मीद है कि पार्लियामेंट मुसलमानों के धर्म, आस्था और उलेमाओं की राय का ख्याल रखते हुए कानून बनाएगी। किसी पार्टी का बहुमत होने से किसी का मजहब नहीं बदल जाता। कोई राजनीतिक दल हिंदू या इस्लाम धर्म में तब्दीली नहीं कर सकता।

धर्म के मामले में राजनीतिक दल का रोल नहीं होना चाहिए

धर्म के मामले में राजनीतिक दल का रोल नहीं होना चाहिए

आजम खान ने कहा कि धर्म और धार्मिक आस्थाओं में किसी राजनीतिक दल का रोल नहीं होना चाहिए, अगर ऐसा होता है तो यह गलत होगा और यह तरीका सही नहीं होगा।

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English summary
Azam Khan statement on supreme court verdict about triple talaq.
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