Auraiya News: तहसील परिसर में बंदर ले उड़ा किसान का बैग, पेड़ पर बैठकर कर दी नोटों की बरसात
Auraiya News: औरैया जिले के बिधूना तहसील में मंगलवार को ऐसा नजारा सामने आया, जिसे देख हर कोई हैरान रह गया। जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे किसान की डिग्गी से बंदर ने पैसों से भरा बैग उठा लिया और पेड़ पर चढ़ते ही नोट हवा में उछाल दिए।
पैसों की बरसात होते ही तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागते हुए गिरे नोट समेटने लगे। कुछ ही मिनटों में हजारों रुपये लोगों की जेबों में समा गए, जबकि किसान और उसका वकील स्तब्ध खड़े रह गए।

यह पूरी घटना देख रहे लोगों ने तुरंत अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। लोग इसे देखकर हैरानी भी जता रहे हैं और मजाकिया टिप्पणियां भी कर रहे हैं।
बैग से निकले नोट, लोग टूट पड़े
जानकारी के अनुसार, डोंडापुर गांव निवासी किसान रोहिताश अपनी जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे थे। उन्होंने करीब 80 हजार रुपये बाइक की डिग्गी में रखे थे। कागजी कार्रवाई में व्यस्त होने के दौरान बंदर ने मौका पाकर बैग निकाल लिया।
पेड़ पर बैठकर बंदर ने बैग से नोट निकालना शुरू किया। देखते ही देखते उसने चारों ओर नोट फेंकने शुरू कर दिए। इस दौरान वहां मौजूद लोग दौड़ते-भागते रुपये लपकने लगे और माहौल कुछ देर तक मेला जैसा हो गया।
हजारों रुपये हुए गायब
किसान के मुताबिक, 80 हजार रुपये में से केवल 52 हजार रुपये ही वापस मिल पाए। करीब 28 हजार रुपये मौके पर मौजूद लोगों ने समेट लिए और फिर चुपचाप निकल गए। कई नोट पेड़ों और छतों पर भी अटक गए।
कुछ नोट बंदरों ने फाड़ दिए, जिससे किसान को और नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि कुछ लोगों ने ईमानदारी दिखाते हुए रकम लौटा दी, लेकिन अधिकांश लोग रुपये लेकर चलते बने। किसान की बेबसी साफ झलक रही थी।
चर्चा का विषय बनी घटना
तहसील परिसर में दिनभर यही घटना चर्चा का विषय बनी रही। लोग इसे कभी हास्यास्पद तो कभी चिंताजनक बता रहे थे। कई लोग बोले कि बंदर ने जैसे नोटों की बारिश कर तहसील को अचानक "मनी ज़ोन" में बदल दिया।
वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प रहीं। किसी ने कहा कि यह अद्भुत दृश्य था, तो किसी ने लिखा कि बंदर ने इंसानों की असली तस्वीर दिखा दी, जहां पैसे देखकर भीड़ का रवैया तुरंत बदल गया।
किसान रोहिताश ने बताया कि इतनी बड़ी भीड़ में यह पहचानना संभव नहीं कि किसने कितना रुपये उठाया। ऐसे में पुलिस को शिकायत देने का भी कोई ठोस आधार नहीं था। वे यह सोचकर परेशान रहे कि मेहनत की कमाई इस तरह बर्बाद हो गई।












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