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वाराणसी जिला जेल में सबकी दुलारी है अंजलि, बनना चाहती है इंजीनियर

वाराणसी। जन्म लेने के बाद साढ़े पांच साल की उम्र तक जेल के अंदर ही उसकी दुनिया थी। घुटनों के बल खिसकने से लेकर अपने पैरों पर चलना भी उसने जेल में ही सीखा। अब वह जेल की चार दिवारी से बाहर निकलकर स्कूल भी जाने लगी है। हम बात कर रहे हैं वाराणसी जिला जेल में पल रही एक ऐसी बच्ची की जिसका जन्म भी जेल में ही हुआ, आपको सुनने में ये बाते थोड़ी अजीबो-गरीब जरूर लग रही होगी, लेकिन यह सत्य है कि वाराणसी में एक बच्ची रोज़ जेल से जाती है स्कूल।

पति की हत्‍या की सजा काट रही अंजलि की मां

पति की हत्‍या की सजा काट रही अंजलि की मां

चंदौली की रहने वाली अंजलि की मां गोल्डी अपने ही पति के कत्ल के आरोप में सजा काट रही है। वारदात के समय वह प्रेग्नेंट थी और उनसे जेल में ही अंजलि को जन्म दिया। जेल की दीवारों के बीच ही घुटनों के बल चलते-चलते अंजली अपने छोटे-छोटे पैरों पर लड़खड़ाते हुए यही बड़ी हुई।

जेल में अंजलि का दम घुटता है

जेल में अंजलि का दम घुटता है

अंजलि अब स्कूल जाती है और बाहर की दुनिया में अपने हमउम्र बच्चों से मिलती-जुलती है। जैसे ही स्कूल की छुट्टी होती है वे मासूम मायूस होकर अपने कंधों पर अपना स्कूल बैग लिए जेल की दीवारों के बीच कैद अपनी मां के पास लौट आती है, क्योकि जेल में उसका दम घुटता है स्कूल में उसे पढ़ाई करना अच्छा लगता है।

इंजीनियर बनना चाहती है अंजलि

इंजीनियर बनना चाहती है अंजलि

अपनी तोतली जुबान में ही अंजलि ने हमें बताया कि मां उसे रोज सुबह नहला धुला कर नाश्‍ता कराकर स्कूल भेजती है और मां चाहती है वह खूब पढ़ाई करे और भविष्‍य संवारे। अंजलि बड़ी होकर इंजीनियर बनाना चाहती है।

मां ने लगायी जेल प्रशासन से गुहार

मां ने लगायी जेल प्रशासन से गुहार

गोल्‍डी चाहती थी की उसकी बेटी की जिंदगी जेल के अंधेरी कोठरी में ना गुजरे, इसलिए उसने उसके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए जेलर पवन से पढ़ाई गुहार लगाई। गोल्‍डी की फरियाद को सहर्ष स्‍वीकार करते हुए जेल एडमिनिस्ट्रेशन ने मासूम अंजलि का एडमिशन पास के घौसाबाद प्राइमरी स्कूल में करा दिया।

जेलकर्मियों की लाडली है अंजलि

जेलकर्मियों की लाडली है अंजलि

अंजलि को स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो और वह सुरक्षा के माहौल में अपनी पढ़ाई पूरी करके इसके लिये जेल प्रशासन ने एक लेडी कांस्टेबल को भी नियुक्त कर दिया। जेल में अंजलि के लिए खिलौने हैं। वहीं जेल कर्मियों की दुलारी बन चुकी अंजलि के खाने-पहनने को लेकर भी प्रशासन काफी ध्‍यान रखता है। जिससे बच्ची को ये अहसास न हो की वो जेल में है।

जेल प्रशासन की वजह से मुख्‍यधारा से जुड़ रही मासूम

जेल प्रशासन की वजह से मुख्‍यधारा से जुड़ रही मासूम

जेल की चाहरदीवारियों के बीच जन्मी इस मासूम को आज जेल प्रशासन व उसकी मां की वजह से समाज की मुख्य धारा से जुड़ने का एक मौका मिल गया है। ऐसे में इंजीनियर बनने का सपना देखने वाली अंजलि को न ही सिर्फ इस पहल ने एक नया मुकाम हासिल कराया, बल्कि उसके सपने को भी एक नई उड़ान दी है।

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