राहुल-अखिलेश का याराना, कितनी हकीकत-कितना फसाना?
भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन से अलग अपनी राह चलने वाली बसपा सुप्रीमो ने भी 14 फरवरी को एक चुनावी सभा में कह दिया कि बहुमत नहीं मिलता है तो वे भाजपा के साथ जाने के बजाय विपक्ष में बैठना पसंद करेगी।
लखनऊ। ये मीडिया वाले भी कम नहीं हैं। कभी किसी को चैन से बैठने नहीं देते। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की यारी अब मीडिया वालों को बेचैन किए हुए हैं। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इन दोनों युवा नेताओं की यारी कितने दिनों तक चलेगी। इतना ही नहीं, इस याराना के हकीकत और फसाना के बीच की दूरी मापने की भी कोशिशें खूब चल रही है। तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चुनाव (11 मार्च) परिणाम आने से पहले ही इन दोनों नेताओं की दोस्ती पर कई दिग्गजों की नजरें टिक गई हैं। बोलचाल की भाषा में तो लोग इसे बेमेल गठबंधन तक कह रहे हैं, जबकि राहुल गांधी ने स्पष्ट कह दिया है कि कांग्रेस-सपा की यारी कोई एक-दो दिन के लिए नहीं बल्कि कभी ना टूटने वाली दोस्ती है। इस पर पुराने राजनीतिक घाघ चुटकी ले रहे हैं। उन्हें लगता है कि चुनाव के बाद यह दोस्ती टूट जाएगी।












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